Mumbai News: टाटा समूह का अंदरूनी विवाद अब देश के दो नामी वकीलों हरीश साल्वे और अभिषेक मनु सिंघवी के बीच अदालती जंग बन चुका है। साइरस मिस्त्री केस में एक साथ टाटा का पक्ष रखने वाले ये दोनों दिग्गज अब अलग-अलग पाले में खड़े हैं।
अभिषेक मनु सिंघवी टाटा संस के फैसलों को चुनौती देने वाले टाटा ट्रस्ट्स की पैरवी कर रहे हैं। वहीं हरीश साल्वे टाटा संस और चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के बचाव में खड़े हैं। यह स्थिति मिस्त्री विवाद के बिल्कुल उलट है, जब दोनों वरिष्ठ वकीलों ने मिलकर ट्रस्ट्स की सर्वोच्चता का समर्थन किया था।
शेयरधारकों के अधिकार और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर उठाए सवाल
अभिषेक मनु सिंघवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि टाटा संस शेयरधारकों के अधिकारों को कमजोर कर रहा है। इसके साथ ही तय कॉर्पोरेट गवर्नेंस नियमों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने साफ किया कि इन अहम मुद्दों का केवल कानूनी समाधान ही निकाला जा सकता है।
सिंघवी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के टाटा-मिस्त्री फैसले को दरकिनार किया जा रहा है। उस ऐतिहासिक फैसले में ट्रस्ट्स को टाटा संस पर प्राथमिकता दी गई थी। उनका तर्क है कि मौजूदा फैसलों से पुराने नियम टूट रहे हैं, जिससे समूह के संचालन और शेयरधारकों के हितों पर गहरा असर पड़ सकता है।
पब्लिक लिस्टिंग और बोर्डरूम टकराव पर साल्वे की दलील
दूसरी तरफ हरीश साल्वे ने चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का मजबूती से समर्थन किया है। साल्वे का तर्क है कि टाटा संस की पब्लिक लिस्टिंग से प्राइवेट कंपनी के पाबंदी वाले नियम खत्म हो जाएंगे। लिस्टिंग होने से बोर्डरूम में चल रहा यह आंतरिक टकराव भी पूरी तरह थम जाएगा।
साल्वे ने विरोधियों पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि लिस्टिंग का विरोध करने वाले कॉर्पोरेट गवर्नेंस की नहीं, बल्कि अपने निजी हितों की चिंता कर रहे हैं। उनका मानना है कि कुछ लोग सिर्फ अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के लिए सुधारों का रास्ता रोक रहे हैं, जिससे विवाद बढ़ रहा है।