Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य में करीब 27 साल बाद लॉटरी सिस्टम को दोबारा शुरू करने जा रही है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान बताया कि पेपर और ऑनलाइन लॉटरी के लिए सोल सेलिंग एजेंट तय करने की प्रक्रिया अब अंतिम दौर में पहुंच चुकी है।
उद्योग मंत्री ने कहा कि वित्त विभाग के तहत ट्रेजरी और लॉटरी निदेशालय ने ई-टेंडर जारी किया है। कैबिनेट की उप-समिति के अध्ययन के बाद यह सिफारिश की गई थी। उन्होंने बताया कि पंजाब, केरल और असम जैसे राज्य लॉटरी से बड़ा राजस्व कमा रहे हैं, जबकि पंजाब अकेले सालाना लगभग 100 करोड़ रुपये जुटाता है।
कमजोर वर्ग को बचाने के लिए नहीं होगी दैनिक लॉटरी
हर्षवर्धन चौहान ने स्पष्ट किया कि आर्थिक संकट से जूझ रहे राज्य का पैसा बाहर जाने से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि गरीब तबके को बचाने के लिए सिंगल डिजिट या डेली लॉटरी शुरू नहीं होगी। सरकार सिर्फ तीन-चार हाई-लेवल बंपर लॉटरी लाएगी, जिससे सालाना 100-150 करोड़ रुपये राजस्व मिलने की उम्मीद है।
दूसरी तरफ विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि देवभूमि में लॉटरी की लत परिवारों को बर्बाद कर देगी और लोग जमीन-जेवर बेचने पर मजबूर होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि आर्थिक सुधार के नाम पर यह कदम केवल कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए उठाया गया है।