Delhi News: देश में विकास और पर्यावरण सुरक्षा के संतुलन पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत के आदेशानुसार अब किसी भी नए प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले पर्यावरणीय मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद मंजूरी देने की पुरानी व्यवस्था पूरी तरह खत्म कर दी गई है।
केंद्र सरकार का 2021 वाला आदेश किया रद्द
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की तीन जजों वाली पीठ ने केंद्र सरकार का 2021 का आदेश रद्द कर दिया। इस आदेश के तहत प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद या पूरा होने पर पर्यावरण मंजूरी दी जाती थी। पीठ ने कुल 49 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय सुनाया है।
पुराने प्रोजेक्ट्स पर नहीं पड़ेगा फैसले का असर
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह नया नियम केवल भविष्य में आने वाली परियोजनाओं पर लागू होगा। जिन कंपनियों या प्रोजेक्ट्स को 2021 के नियम के तहत पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। शीर्ष अदालत ने छह दिन की सुनवाई के बाद 1 अप्रैल 2026 को फैसला सुरक्षित रखा था।
पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की व्यवस्था गलत
अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के बाद माफी मांगने या मंजूरी लेने का तरीका गलत है। केंद्र सरकार किसी विशेष परिस्थिति में नोटिफिकेशन जारी कर सीमित समय की राहत ला सकती है, लेकिन इसे स्थायी जरिया बनाकर उल्लंघनों को नियमित नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 142 के तहत कोर्ट के पास विशेष अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में जोड़ा कि अगर बहुत जरूरी समझा गया, तो अदालत अपने विशेष अधिकारों (अनुच्छेद 142) का इस्तेमाल कर सकती है। इसके जरिए कोर्ट असाधारण मामलों में काम शुरू होने के बाद भी पर्यावरण मंजूरी देने पर विचार कर सकता है। हालांकि सामान्य मामलों में यह छूट नहीं मिलेगी।