बीबीएमबी में जीत के बाद अब चंडीगढ़ में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए लड़ेगा हिमाचल: विक्रमादित्य सिंह

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Shimla News: भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में बिजली हिस्सेदारी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि बीबीएमबी में अधिकार सुरक्षित करने के बाद अब राज्य सरकार चंडीगढ़ में हिमाचल प्रदेश की 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का दावा कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर मजबूती से उठाएगी।

शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान लोक निर्माण मंत्री ने बताया कि बीबीएमबी में प्रदेश के हक की लड़ाई वर्ष 1996 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह ने शुरू की थी। पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के प्रावधानों के तहत हिमाचल प्रदेश बीबीएमबी परियोजनाओं में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का स्वाभाविक हकदार है। लगभग चार दशकों के लंबे संघर्ष के बाद अब राज्य को उसका वास्तविक लाभ मिलने जा रहा है।

सालाना 400 से 500 करोड़ रुपये का मिलेगा आर्थिक लाभ

विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि वर्ष 2011 में भी सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के अधिकारों को स्वीकार करते हुए क्रियान्वयन के निर्देश दिए थे, लेकिन बकाया ऊर्जा लाभों की गणना और उसकी वसूली का विषय अटका हुआ था।

सर्वोच्च न्यायालय के नवीनतम फैसले के तहत:

  • हिमाचल प्रदेश को आगामी 20 वर्षों तक प्रतिवर्ष 60 करोड़ यूनिट बिजली प्राप्त होगी।
  • इस अतिरिक्त ऊर्जा आवंटन से प्रदेश को हर साल लगभग 400 से 500 करोड़ रुपये का सीधा राजस्व लाभ होने का अनुमान है।
  • मंत्री ने मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व और शीर्ष अधिवक्ताओं की प्रभावी पैरवी को इस कानूनी विजय का आधार बताया।

चंडीगढ़ में हिस्सेदारी और विस्थापितों के अधिकारों की पैरवी

मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अपने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भाखड़ा-नंगल और पोंग बांध परियोजनाओं के कारण विस्थापित हुए परिवारों के अधिकारों और पुनर्वास के लंबित मामलों को भी प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाएगा।

इसके साथ ही, पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के आधार पर केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में भी हिमाचल के 7.19 प्रतिशत के कानूनी अधिकार को लेकर सरकार आगामी रणनीति के तहत आगे बढ़ेगी।

Desh Raj
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