Lucknow News: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने केंद्रीय नेतृत्व को 25 संभावित उम्मीदवारों की सूची भेज दी है। इस पैनल में मशहूर कवि कुमार विश्वास और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का नाम शामिल होने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं।
राज्य में 16 अक्टूबर 2026 को उच्च सदन की 10 सीटों पर चुनाव प्रस्तावित हैं। बीजेपी ने 8 सीटों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली हाईकमान को नामों का बड़ा पैनल भेजा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन 25 नामों में कई वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ चौंकाने वाले चेहरे भी शामिल किए गए हैं।
पैनल में सबसे ज्यादा ध्यान कुमार विश्वास के नाम ने खींचा है। आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और विख्यात कवि कुमार विश्वास बीजेपी संगठन से सीधे नहीं जुड़े हैं। इसके बावजूद उनका नाम संभावित सूची में शामिल होना राजनीतिक जानकारों के लिए बेहद हैरान करने वाला फैसला माना जा रहा है।
बीजेपी के संभावित पैनल में शामिल प्रमुख दिग्गज नाम
इस पैनल में कई राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर के बड़े चेहरे शामिल हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और संजीव बालियान के अलावा केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का नाम भी चर्चा में है। इसके साथ ही राजवीर सिंह राजू भैया, हरीश द्विवेदी, सुब्रत पाठक, त्र्यंबक त्रिपाठी, दुर्विजय शाक्य और सुरेश राणा भी रेस में हैं।
सूची में कौशल किशोर, कामेश्वर सिंह, दिलीप पटेल, अनिल अग्रवाल, राजेंद्र अग्रवाल, ममतेश शाक्य, रमापति राम त्रिपाठी, सत्यपाल सिंह, बृजलाल, रामशंकर कठेरिया और प्रकाश पाल के नाम भी शामिल हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व अब जातीय और क्षेत्रीय संतुलन देखकर अंतिम आठ नामों पर मुहर लगाएगा।
महिला प्रतिनिधित्व पर विशेष जोर और सामाजिक संतुलन की कोशिश
बीजेपी ने अपने 25 संभावित नामों के पैनल में आधी आबादी को भी पूरा महत्व दिया है। इस सूची में चार प्रमुख महिला नेताओं के नाम शामिल किए गए हैं। पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, पूर्व सांसद रेखा वर्मा, प्रियंका रावत और गीता शाक्य पर भरोसा जताते हुए उनके नाम आगे बढ़ाए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी सामाजिक समीकरणों को साधते हुए संगठन में सक्रिय महिलाओं को संसद भेजने की तैयारी में है। पार्टी के भीतर इस बात पर भी गहन मंथन चल रहा है कि पुराने अनुभवी चेहरों को दोहराया जाए या फिर नए नेताओं को सदन में मौका मिले।