Shimla News: हिमाचल प्रदेश में सितंबर के आखिरी सप्ताह में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार सोमवार 28 सितंबर को लाहुल-स्पीति में भारी हिमपात और वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों को संवेदनशील तथा लैंडस्लाइड प्रभावित इलाकों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है।
छह वर्ष बाद लाहुल-स्पीति की पिन और लोसर घाटियों में सितंबर महीने में चार से छह इंच तक ताजा हिमपात दर्ज किया गया है। इस असमय बर्फबारी के कारण दिन के तापमान में 7 डिग्री सेल्सियस तक की बड़ी गिरावट आई है, जिससे पूरे क्षेत्र में कड़ाके की ठंड बढ़ गई है।
ताजा बर्फबारी से एक तरफ पर्यटन कारोबार को रफ्तार मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ सेब और आलू की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। इस समय खेतों में आलू की फसल लगी है और सेब का तुड़ान चल रहा है। साल 2020 में भी आंधी और भारी बर्फबारी के कारण सेब से लदे कई पेड़ टूट गए थे। किन्नौर जिले में भी हिमपात के साथ तेज बारिश दर्ज हुई है।
प्रदेश में ताजा हिमपात, वर्षा और भूस्खलन के चलते कुल 61 सड़कें यातायात के लिए पूरी तरह बंद हो गई हैं। इसके अलावा 137 बिजली ट्रांसफार्मर खराब पड़े हैं। बीते वर्ष 7 अक्टूबर को इन घाटियों में बर्फबारी हुई थी। इस बार असमय बर्फ जमने से तुड़ान के अंतिम चरण में पहुंचे सेब के पेड़ों की टहनियां टूटने की खबरें आ रही हैं।
सड़कों के बंद होने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है। इसमें लाहुल-स्पीति की 25, मंडी की 19 तथा कुल्लू और कांगड़ा की छह-छह सड़कें शामिल हैं। बिजली आपूर्ति बाधित होने से कई क्षेत्र अंधेरे में हैं। किन्नौर में 59 और सिरमौर में 58 ट्रांसफार्मर बंद हैं। ताबो में 46 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चली।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार कल्पा में न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कल्पा का अधिकतम तापमान 8.2 डिग्री रहा, जो सामान्य से 12.1 डिग्री कम है। कल्पा में 45 मिमी और सांगला में 66.4 मिमी बारिश हुई। स्पीति के ताबो में अधिकतम तापमान केवल 6 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य से 7.2 डिग्री कम रहा। मंडी में भी 21.6 मिमी बारिश हुई है।
मानसून सीजन के दौरान 30 जून से 27 सितंबर तक प्रदेश में लोक निर्माण, जल शक्ति विभाग और निजी संपत्ति को मिलाकर 3,219.90 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो चुका है। इस दौरान प्राकृतिक आपदाओं की वजह से 149 लोगों की जान चली गई, जबकि विभिन्न सड़क दुर्घटनाओं में 220 लोगों की मौत दर्ज की गई है।