हरियाणा में देसी गायों के प्रति बढ़ा पशुपालकों का रुझान, सरकार दे रही 25 हजार रुपये तक प्रोत्साहन राशि

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Rohtak News: हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में देसी नस्ल की गायें अब केवल धार्मिक आस्था तक सीमित न रहकर किसानों की आजीविका और आय का प्रमुख साधन बन रही हैं। साहीवाल, थारपारकर और हरियाणवी जैसी उच्च गुणवत्ता वाली देसी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार पशुपालकों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।

पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. रविंद्र सहरावत के अनुसार देसी गोवंश के प्रति किसानों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2012 में जहां राज्य में कुल गायों की संख्या 18.08 लाख थी, वहीं 2019 की पशुधन गणना में यह आंकड़ा बढ़कर 19.32 लाख तक पहुंच गया। इनमें देसी गोवंश की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है।

दूध उत्पादन बढ़ाने पर विशेष वित्तीय प्रोत्साहन

राज्य सरकार अधिक दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली प्रमाणित देसी गायों की पहचान कर पशुपालकों को 5,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दे रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 31 दिसंबर तक ऐसी 1,466 उच्च दुग्ध उत्पादक देसी गायों को चिन्हित कर उनके पालकों को इस योजना से जोड़ा गया है।

पशुपालन क्षेत्र में आए इस सकारात्मक बदलाव से राज्य के कुल दुग्ध उत्पादन में भारी उछाल आया है। हरियाणा का वार्षिक दूध उत्पादन 2014-15 के 79.01 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 125.93 लाख टन के स्तर पर पहुंच गया है, जिससे डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित हो रहा है।

पशुधन क्रेडिट कार्ड से वित्तीय मजबूती

किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 2.20 लाख पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड स्वीकृत किए गए हैं। इसके अंतर्गत पशुपालकों को अब तक 3,449 करोड़ रुपये की ऋण सहायता उपलब्ध कराई गई है। विशेषज्ञ डॉ. मोहनलाल बालेसरा के अनुसार पारंपरिक गोपाल परंपरा को आधुनिक अर्थव्यवस्था से जोड़ना डेयरी क्षेत्र के लिए सकारात्मक पहल है।

आधुनिक पशुपालन तकनीकों और सरकारी सब्सिडी के समन्वय से राज्य के किसान पारंपरिक कृषि के साथ डेयरी व्यवसाय को व्यावसायिक मॉडल के रूप में अपना रहे हैं। उन्नत नस्ल सुधार कार्यक्रमों और पोषण प्रबंधन के कारण देसी गायों का दूध बाजार में प्रीमियम दरों पर बिक रहा है, जिससे पशुपालकों की शुद्ध आय में इजाफा हुआ है।

Desh Raj
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