New Delhi News: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा हो गया है। 2 सितंबर को भारतीय क्रूड बास्केट 99.35 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। इससे देश का आयात बिल बढ़ने और पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में भारतीय बास्केट का औसत 97.32 डॉलर प्रति बैरल हो चुका है। यह जुलाई के 82.04 डॉलर के मुकाबले लगभग 19 फीसदी अधिक है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 96.22 डॉलर पर है। इस तरह भारतीय रिफाइनरियों के लिए कच्चा तेल ब्रेंट के मुकाबले तीन डॉलर प्रति बैरल अधिक महंगा पड़ रहा है।
ईरान के दक्षिणी तट पर अमेरिकी सेना के ताजा हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता है। वैश्विक बाजार में अमेरिकी क्रूड डब्ल्यूटीआई 91.79 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। दोनों प्रमुख बेंचमार्क लगातार चौथे दिन बढ़त पर रहे। तनाव के चलते पश्चिम एशिया से तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता काफी बढ़ गई है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। भारतीय बास्केट में ब्रेंट स्वीट क्रूड और ओमान-दुबई सॉर क्रूड शामिल होता है। इस बास्केट में स्वीट क्रूड का अनुपात सितंबर में बढ़कर 77.81 फीसदी हो गया है। इस संरचनात्मक बदलाव की वजह से भी भारतीय तेल खरीद पर वैश्विक कीमतों की तेजी का सीधा असर दिख रहा है।
चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में भारत 63.4 बिलियन डॉलर का क्रूड आयात कर चुका है। यह पिछले पूरे साल के 123 बिलियन डॉलर बिल के आधे से ज्यादा है। कच्चे तेल में एक डॉलर की बढ़त से देश का सालाना बिल 18 हजार करोड़ रुपये बढ़ता है। इससे चालू खाता घाटा और घरेलू महंगाई दोनों बढ़ सकती हैं।
होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण भारत अब रूस, अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीद रहा है, लेकिन लंबे समुद्री रास्तों से परिवहन लागत बढ़ रही है। इधर अगस्त में पेट्रोल की मांग 7.88 फीसदी और डीजल की मांग 6.46 फीसदी बढ़ी है। बढ़ती घरेलू मांग के बीच महंगा तेल देश की आर्थिक ग्रोथ के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है।
कमोडिटी विशेषज्ञ अनुज गुप्ता के मुताबिक यदि अक्टूबर में भारतीय बास्केट 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती है, तो नवंबर या दिसंबर में पेट्रोल-डीजल के दाम 3 से 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सभी की नजर अमेरिका-ईरान युद्ध पर है, हालांकि ब्रेंट अब भी 100 डॉलर से नीचे बना हुआ है।