कैलिफोर्निया में 20 हजार डाक मतपत्रों को रोकने की ट्रंप प्रशासन की याचिका खारिज, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से झटका

Share

- Advertisement -

Washington News: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप प्रशासन की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें कैलिफोर्निया के 20 हजार से अधिक डाक मतपत्रों की गिनती पर रोक लगाने की मांग की गई थी। न्याय विभाग का दावा था कि इन मतदाताओं में गैर-नागरिक शामिल हो सकते हैं, लेकिन शीर्ष अदालत ने निचली अदालतों के फैसले को बरकरार रखते हुए प्रशासन को कोई राहत नहीं दी।

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने कैलिफोर्निया में 20 हजार से अधिक पंजीकृत मतदाताओं के डाक मतपत्रों (Mail-in Ballots) की गिनती अस्थायी रूप से रोकने संबंधी न्याय विभाग की अंतिम समय की अपील को खारिज कर दिया। प्रशासन ने आरोप लगाया था कि इन मतदाताओं में कुछ ऐसे लोग हो सकते हैं जो अमेरिकी नागरिक नहीं हैं, इसलिए नागरिकता की पुष्टि होने तक उनके मतपत्र अलग रखे जाने चाहिए।

न्याय विभाग की मांग और अपीलीय अदालत का रुख

अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर मांग की थी कि विवादित मतपत्रों को अलग किया जाए और जांच पूरी होने तक उनकी गिनती न की जाए। इससे पहले शुक्रवार को संघीय अपीलीय अदालत ने भी प्रशासन की इस मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद प्रशासन ने त्वरित हस्तक्षेप के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने बिना किसी विस्तृत सुनवाई या देरी के प्रशासन की इस अर्जी को अस्वीकार कर दिया।

कैलिफोर्निया प्रशासन ने बताया चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने का प्रयास

कैलिफोर्निया के अटार्नी जनरल रॉब बोंटा ने ट्रंप प्रशासन के इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करने और वैध मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का प्रयास बताया। उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि राज्य सरकार प्रत्येक पात्र मतदाता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करेगी।

कैलिफोर्निया सरकार ने अदालत के समक्ष स्पष्ट किया कि राज्य में गैर-नागरिकों द्वारा मतदान को रोकने के लिए पहले से ही बेहद सख्त और मजबूत कानूनी व्यवस्था मौजूद है। मतदाता पंजीकरण के दौरान नागरिकता का शपथपत्र अनिवार्य होता है।

राज्यों के संवैधानिक अधिकार बनाम संघीय हस्तक्षेप की बहस

निचली अदालत और अपीलीय अदालत दोनों ने ही प्रशासन की मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि चुनाव प्रक्रिया में अंतिम क्षणों में किया गया ऐसा हस्तक्षेप गंभीर प्रशासनिक अराजकता पैदा कर सकता है। अदालतों ने चुनाव संचालन को लेकर राज्यों के संवैधानिक अधिकारों और नागरिकों के मताधिकार पर गहरी चिंता व्यक्त की।

अमेरिकी संविधान के तहत चुनाव आयोजित कराने का प्राथमिक अधिकार राज्यों के पास है। मध्यावधि चुनाव के मतदान से चंद घंटे पहले आए इस फैसले से संघीय सरकार और राज्य सरकारों के बीच चुनाव संचालन को लेकर चल रही संवैधानिक बहस और तेज हो गई है।

Desh Raj
Desh Raj
Please wait....

Read more

Related News