Lucknow News: अमेरिका के मिशिगन में डेमोक्रेटिक नेता अब्दुल अल-सैयद की अमेरिकी सीनेट चुनाव में जीत के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस जीत का हवाला देते हुए राज्य के मुस्लिम मतदाताओं को अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और मजबूत नेतृत्व स्थापित करने का आह्वान किया है।
अमेरिका के मिशिगन राज्य में 3 नवंबर को हुए सीनेट चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराकर इतिहास रच दिया है। 42 वर्षीय चिकित्सक अब्दुल अल-सैयद अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बनने जा रहे हैं। इस जीत के बाद भारत में, विशेषकर उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में इसकी चर्चा तेज हो गई है।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि एक अब्दुल मिशिगन में जीत गया है, अब उत्तर प्रदेश के अब्दुल को भी अपनी सियासी पहचान मजबूत करनी होगी। उन्होंने लिखा कि संघियों ने “अब्दुल” शब्द को एक तंज में बदलने की बहुत कोशिश की है, लेकिन अब वक्त आ गया है कि दिखाया जाए कि अब्दुल अल्लाह के सिवा किसी की गुलामी नहीं करता। ओवैसी ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अब रैलियों में दरी नहीं बिछाई जाएगी।
मिशिगन के अब्दुल और यूपी के ‘अब्दुल’ में क्या है बड़ा अंतर?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मिशिगन और उत्तर प्रदेश के संदर्भ में सबसे बड़ा अंतर राजनीतिक भूमिका और स्थिति का है। मिशिगन में अब्दुल अल-सैयद एक उम्मीदवार और नीति निर्माता के रूप में अपनी धार्मिक पहचान के साथ सत्ता के शीर्ष सदन तक पहुंचे हैं। इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश में ‘अब्दुल’ किसी व्यक्ति विशेष का नाम न होकर आम मुस्लिम मतदाता का एक राजनीतिक प्रतीक बन चुका है, जिसे दल केवल वोट बैंक के तौर पर देखते रहे हैं। मुद्दामिशिगन का अब्दुलयूपी का अब्दुल पहचानमुस्लिम अमेरिकी राजनेतामुस्लिम मतदाता का राजनीतिक प्रतीक राजनीतिक भूमिकास्वयं निर्वाचित जनप्रतिनिधिराजनीतिक दलों का समर्थक वर्ग चुनावी मुद्देस्वास्थ्य, महंगाई, रोजगार व आर्थिक नीतियांप्रतिनिधित्व, हिस्सेदारी और राजनीतिक नेतृत्व राजनीतिक चुनौतीधार्मिक पहचान पर तीखे हमलेवोट बैंक की राजनीति का आरोप लक्ष्यसीनेट में नीतियां और कानून बनानाअपनी स्वतंत्र राजनीतिक ताकत स्थापित करना वर्तमान स्थितिसीनेट चुनाव जीतकर इतिहास रचानेतृत्व में हिस्सेदारी पर मंथन जारी
स्वास्थ्य और आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित रहा मिशिगन का प्रचार अभियान
अब्दुल अल-सैयद के सामने चुनाव में कई गंभीर चुनौतियां थीं। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के साथ-साथ उनकी धार्मिक पहचान को भी निशाना बनाया गया, यहां तक कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन पर तीखे व्यक्तिगत हमले किए। इसके बावजूद उन्होंने अपनी राजनीति को केवल धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने महंगे इलाज, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं, बढ़ती महंगाई और आम नागरिकों की आर्थिक दिक्कतों को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया, जिसका सकारात्मक असर चुनाव परिणामों में देखने को मिला।
उत्तर प्रदेश में हिस्सेदारी और नेतृत्व पर सवाल
उत्तर प्रदेश की राजनीति में असदुद्दीन ओवैसी लगातार विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधते रहे हैं। ओवैसी का आरोप है कि मुस्लिम समाज को केवल चुनाव के समय याद किया जाता है, लेकिन सरकार और पार्टी संगठनों में उन्हें वाजिब हिस्सेदारी नहीं दी जाती। उन्होंने अपनी जनसभाओं में सवाल उठाया कि समाज का आम व्यक्ति कब तक अन्य सियासी परिवारों के लिए केवल रैलियों में दरी बिछाता रहेगा। ओवैसी का तर्क है कि अब समय आ गया है कि यूपी का मुस्लिम समाज केवल समर्थक बनकर रहने के बजाय स्वयं विधायक और सांसद बनकर राजनीतिक नेतृत्व संभाले।