Tehran News: मध्य पूर्व में शांति की कोशिशों को गहरा झटका लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों की समयसीमा खत्म होने के बाद दोनों देशों में तनाव चरम पर पहुंच गया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ ऐतिहासिक शांति समझौता सोमवार को बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गया है।
शांति समझौते की 60 दिनों की समयसीमा समाप्त
दोनों देशों के बीच 17 जून को पाकिस्तान की मेजबानी में हुए समझौते की 60 दिनों की समयसीमा सोमवार को समाप्त हो गई। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में तीन महीने से जारी जंग को रोकना था। अब दोनों देश एक-दूसरे पर शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं।
समझौते की प्रमुख शर्तें और प्रतिबद्धताएं
जून में हुए इस समझौते के तहत दोनों पक्षों को सैन्य अभियान पूरी तरह रोकने थे। अमेरिका को नाकेबंदी खत्म करने, प्रतिबंधों में ढील देने और 300 अरब डॉलर के पैकेज पर काम करना था। वहीं ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से माइन्स हटाकर जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना था।
वार्ता के पटरी से उतरने के मुख्य कारण
जुलाई की शुरुआत से ही दोनों देशों के बीच मतभेद गहराने लगे थे। 7 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को अप्रभावी घोषित कर दिया था। इसके बाद अमेरिका ने सभी प्रतिबंध भी नहीं हटाए, जिसके जवाब में ईरान ने भी समझौते की प्रतिबद्धताओं पर रोक लगा दी।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना विवाद का केंद्र
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार यह समझौता स्थायी शांति के लिए था। अमेरिका द्वारा शर्तों के उल्लंघन के बाद इसे आगे बढ़ाने का औचित्य नहीं बचता। ईरान अब ओमान के साथ होर्मुज से जुड़े नए शिपिंग रूट को लेकर एक अलग समझौते पर विचार कर रहा है।
ट्रंप की चेतावनी और ईरान की आक्रामक रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने की चेतावनी दी है। दूसरी तरफ ईरान ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की कमान पूर्व कमांडर मोहसिन रेजाई को सौंप दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से तेहरान का रुख और अधिक सख्त हो सकता है।