Jordan News: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों से बड़ा अटैक किया है। सोमवार को किंग हुसैन और अल अजराक बेस को निशाना बनाया गया। यह एक्शन हाल ही में लारक आइलैंड पर हुए अमेरिकी हमले के जवाब में लिया गया है।
ईरानी स्टेट मीडिया के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिका को पहले ही कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि लारक आइलैंड पर अटैक का जवाब ‘ईरान के बेटे’ जरूर देंगे। हमलावर को इस उकसावे की भारी कीमत चुकानी होगी। आईआरआईबी (IRIB) की रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, लारक आइलैंड पर हुए अमेरिकी अटैक में कई ईरानी कर्मचारी और आम नागरिक मारे गए थे। साथ ही कई लोग घायल भी हुए। आईआरजीसी (IRGC) के प्रवक्ता ने सख्त लहजे में कहा है कि अमेरिका को अब आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर इसका गंभीर परिणाम भुगतना होगा।
ग्लोबल एनर्जी सप्लाई और लारक आइलैंड का सामरिक महत्व
लारक आइलैंड का ऐतिहासिक और मिलिट्री नजरिए से बहुत महत्व है। यहां ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का नेवी बेस मौजूद है। यह आइलैंड होर्मुज जलडमरूमध्य के मेन शिपिंग रूट्स पर सीधी नजर रखता है। ऐतिहासिक तौर पर भी यहां कई मिलिट्री बेस और मिसाइल साइट्स पूरी तरह एक्टिव रही हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य ग्लोबल एनर्जी सप्लाई के लिए एक बेहद संवेदनशील और जरूरी रूट है। मौजूदा संघर्ष शुरू होने से पहले, दुनिया भर के कुल ऑयल और एलएनजी (LNG) शिपमेंट का लगभग बीस प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता था। इसलिए लारक आइलैंड का कंट्रोल सैन्य दृष्टि से काफी अहम है।