Chitwan News: हिमालयी क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद नेपाल के चितवन जिले में अज्ञात शवों को दफनाने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मुर्दाघर में जगह की कमी और सड़न के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने 250 शवों के डीएनए सैंपल लेकर उन्हें अस्थायी कब्रों में दफनाया है।
सीमित फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य कारणों से लिया गया फैसला
भोटेकोशी नदी में बहकर आए शवों की बड़ी संख्या के कारण स्थानीय फॉरेंसिक टीमों पर भारी दबाव आ गया। भीषण गर्मी और नमी के कारण शव तेजी से खराब हो रहे थे। हेल्थ एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी थी कि शवों को खुले में रखने से गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं, इसलिए यह कदम उठाया गया।
पुलिस इंस्पेक्टर अनिल थापा के अनुसार, शवों को दफनाने से पहले उनके डीएनए सैंपल, फेशियल फीचर्स की तस्वीरें और जरूरी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं। हर शव को एक खास रेफरेंस नंबर दिया गया है, ताकि पहचान साबित होने के बाद परिजन इन शवों को लेकर अपना पारंपरिक अंतिम संस्कार कर सकें।
हिंदू रीति-रिवाजों की अनदेखी का आरोप और सरकार की सफाई
स्थानीय नागरिकों और पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टाराई ने बिना पहचान और परिवार की सहमति के शवों को दफनाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई इंटरनेशनल डिजास्टर प्रोटोकॉल के तहत की गई है और रिकॉर्ड मिलान के बाद शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।