Washington News: अमेरिका में F-1 और J-1 वीजा पर पढ़ाई कर रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए एक बड़ी खबर आई है। भारतीय समुदाय के एक प्रमुख नीति समूह ने चेतावनी दी है कि चार साल की नई समय-सीमा के कारण कई छात्रों को अपनी डिग्री या रिसर्च अधूरी छोड़कर अमेरिका वापस लौटना पड़ सकता है।
फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (FIIDS) ने अमेरिकी अधिकारियों और यूएससीआईएस से गृह सुरक्षा विभाग के इस नए नियम को तुरंत लागू न करने की पुरजोर अपील की है। संगठन का मानना है कि इस नीति से भारतीय और अन्य विदेशी छात्रों का भविष्य अनिश्चितता में पड़ जाएगा।
चार साल की सीमा और ग्रेस पीरियड में कटौती
नए नियम के तहत दशकों पुरानी ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ नीति को समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर रहने की अधिकतम समय-सीमा चार साल तय की गई है। इस नई सीमा में ‘ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग’ और ‘एसटीईएम ओपीटी’ को भी शामिल किया गया है, जिससे छात्रों का वर्क एक्सपीरियंस समय भी प्रभावित होगा।
इसके अलावा पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाले ग्रेस पीरियड को 60 दिन से घटाकर केवल 30 दिन कर दिया गया है। अब छात्रों को वीजा विस्तार के लिए फॉर्म I-539 के माध्यम से यूएससीआईएस की मंजूरी लेनी होगी। एफआईआईडीएस ने इस फैसले को अमेरिका की प्रतिस्पर्धा क्षमता के लिए एक बड़ा नुकसान बताया है।
पीएचडी और रिसर्च प्रोग्राम पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में बैचलर डिग्री पूरी करने में औसतन 52 महीने और पीएचडी में लगभग 5.7 साल का समय लगता है। वहीं दूसरी तरफ यूएससीआईएस के पास पहले से ही लाखों आवेदन पेंडिंग पड़े हैं, जिनकी प्रोसेसिंग में एक साल तक का लंबा समय लग जाता है।
डॉक्टरेट कोर्स और मेडिकल ट्रेनिंग जैसे रिसर्च आधारित प्रोग्राम अक्सर चार साल से ज्यादा समय लेते हैं। जे-1 रिसर्च स्कॉलर्स और डॉक्टरों को अपना काम पूरा करने में पांच से सात साल लगते हैं। वीजा एक्सटेंशन में अनिश्चितता के कारण लैब्स में रिसर्च रुक सकती है और ग्रेजुएशन में काफी देरी हो सकती है।
एफआईआईडीएस ने यूएससीआईएस से की प्रशासनिक राहत की मांग
संगठन ने अमेरिकी सरकार से मांग की है कि अच्छे एकेडमिक रिकॉर्ड वाले छात्रों को ऑटोमैटिक एक्सटेंशन दिया जाए। इसके अलावा चार साल की गणना से ओपीटी और एसटीईएम ओपीटी को बाहर रखा जाए और पुराने 60 दिनों के ग्रेस पीरियड को फिर से बहाल किया जाए ताकि छात्रों को परेशानी न हो।
हाल के आंकड़ों के अनुसार नए अंतरराष्ट्रीय छात्रों के दाखिले में 17 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था को 1.1 बिलियन डॉलर से ज्यादा के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा है। साथ ही लगभग 23,000 कम रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।