Washington: होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केश्म द्वीप पर अमेरिकी सेना ने सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे रक्षात्मक कदम बताते हुए कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी विमानों पर दागी गई मिसाइलों के जवाब में की गई। इस हमले के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और वैश्विक तेल व गैस आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक केंद्र माने जाने वाले केश्म द्वीप पर हमला किया। इस कार्रवाई के बाद द्वीप पर पांच बड़े धमाकों की आवाजें सुनी गईं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह एक सीमित और रक्षात्मक कार्रवाई थी, जिसका मकसद क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
रक्षात्मक कार्रवाई के तहत हुआ हमला: अमेरिकी अधिकारी
अमेरिकी मीडिया नेटवर्क सीएनएन को तीन अमेरिकी अधिकारियों ने जानकारी दी कि यह कार्रवाई पूरी तरह रक्षात्मक उद्देश्य से की गई थी। एक अधिकारी के अनुसार, ईरान की ओर से अमेरिकी एयरक्राफ्ट पर सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें दागी गई थीं। इसी के प्रत्युत्तर में अमेरिका ने केश्म द्वीप पर यह लक्षित हमला किया।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में भी इस ऑपरेशन का उल्लेख करते हुए बताया गया कि अमेरिका पूर्व में भी ईरान पर इस तरह के सीमित और रणनीतिक हमले करता रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कोई पूर्ण युद्ध अभियान नहीं, बल्कि ईरान के लिए एक स्पष्ट चेतावनी थी।
चुनाव से ठीक पहले कार्रवाई, ट्रंप और वेंस के बयान
यह सैन्य कार्रवाई अमेरिकी चुनाव से ठीक एक दिन पहले हुई, जबकि राजनीतिक विश्लेषक मान रहे थे कि यदि कोई सैन्य कदम उठाया भी जाएगा तो वह चुनाव के बाद ही होगा।
घटनाक्रम के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान के साथ समझौता अब भी संभव है। फॉक्स न्यूज से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई बड़ा या वास्तविक युद्ध नहीं है, बल्कि एक सीमित स्थिति है और दोनों ही पक्ष कूटनीतिक समाधान चाहते हैं। वहीं उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि दोनों देशों के बीच वार्ता में कुछ प्रगति जरूर हुई है, लेकिन अमेरिका के पास सैन्य और गैर-सैन्य दोनों तरह के विकल्प पूरी तरह खुले हैं।
कच्चे तेल और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर का जोखिम
विशेषज्ञों का आकलन है कि यदि यह सीमित टकराव व्यापक संघर्ष में बदलता है, तो इसका सबसे गंभीर प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों पर पड़ेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इस मार्ग पर किसी भी प्रकार के व्यवधान से वैश्विक तेल आपूर्ति सीधे प्रभावित हो सकती है।
यदि तनाव बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 20 से 30 प्रतिशत तक उछल सकती हैं। इससे पूर्व भी इस क्षेत्र में तनाव के दौरान ब्रेंट क्रूड में 10 से 15 डॉलर प्रति बैरल की तेजी दर्ज की जा चुकी है। इसके अलावा, कई देश द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं। ईंधन के दामों में वृद्धि से भारत, चीन, जापान और यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर आयात बिल और घरेलू मुद्रास्फीति का सीधा दबाव बढ़ सकता है। अमेरिकी प्रशासन भी घरेलू महंगाई को देखते हुए समझौते का पक्षधर बना हुआ है, हालांकि ईरान पर कूटनीतिक और रणनीतिक दबाव लगातार जारी है।