बचपन की गरीबी का असर वयस्क होने तक रहता है बरकरार, ऑस्ट्रेलियाई अध्ययन में हुआ खुलासा

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Sydney News: ऑस्ट्रेलिया में हुए एक नए अध्ययन से सामने आया है कि बचपन में गरीबी झेलने वाले बच्चों के युवावस्था में भी आर्थिक तंगी में रहने का जोखिम सामान्य परिवारों के मुकाबले पांच गुना अधिक होता है। ‘द इकोनॉमिक रिकॉर्ड’ में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, अभाव में बीता बचपन 24 से 35 वर्ष की आयु तक शिक्षा, रोजगार और पारिवारिक स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।

ऑस्ट्रेलिया में बच्चों के बीच गरीबी और वयस्क होने पर उसके दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर हुए एक विस्तृत अध्ययन में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। ऑस्ट्रेलियन काउंसिल ऑफ सोशल सर्विस (ACOSS) और यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (UNSW) सिडनी के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022-23 में 15 वर्ष से कम आयु के लगभग 7 लाख 57 हजार बच्चे गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे थे। यह संख्या देश में हर छह में से एक बच्चे के बराबर है। ‘द इकोनॉमिक रिकॉर्ड’ में प्रकाशित ताजा शोध से पता चलता है कि बचपन के इस अभाव का असर वयस्क होने के बाद 20वें और 30वें दशक तक बना रहता है।

यह अध्ययन ‘हाउसहोल्ड, इनकम एंड लेबर डायनामिक्स इन ऑस्ट्रेलिया’ (HILDA) सर्वे के आंकड़ों पर आधारित है, जो वर्ष 2001 से ऑस्ट्रेलियाई परिवारों पर नजर रख रहा है। इस शोध में 2,205 ऐसे लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, जिनके बचपन की पारिवारिक आय की कम से कम तीन साल तक निगरानी की गई थी और 24 साल की उम्र के बाद भी उनकी आय दर्ज की गई थी।

सामान्य परिवारों की तुलना में पांच गुना अधिक जोखिम

अध्ययन में गरीबी के आंकलन के लिए ‘सापेक्ष आय’ (रिलेटिव इनकम) पद्धति का उपयोग किया गया, जिसमें टैक्स और सरकारी कल्याणकारी भुगतानों के बाद परिवार की खर्च योग्य आय को देखा जाता है। शोध के मानक के अनुसार, दो बच्चों वाले दंपति के परिवार के लिए गरीबी रेखा लगभग 72,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और दो बच्चों वाले एकल अभिभावक के लिए लगभग 55,000 डॉलर तय की गई थी।

शोधकर्ताओं ने पाया कि गरीबी रेखा से नीचे पले-बढ़े बच्चों के वयस्क होने पर यानी 24 से 35 वर्ष की उम्र में गरीब रहने की संभावना 27 प्रतिशत तक पाई गई। इसके विपरीत, गरीबी रेखा से 150 से 200 प्रतिशत आय (मध्यम आय वर्ग) वाले परिवारों में पले-बढ़े बच्चों के लिए यह जोखिम मात्र 5 प्रतिशत दर्ज किया गया। इस प्रकार दोनों वर्गों के जोखिम में पांच गुना से अधिक का अंतर देखा गया।

एकल अभिभावक वाले परिवारों पर दोहरी मार

ऑस्ट्रेलिया में लगभग 12 लाख एकल अभिभावक (सिंगल पैरेंट) परिवार हैं। ACOSS-UNSW की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 में एकल अभिभावक वाले परिवारों के 37 प्रतिशत बच्चे गरीबी में जी रहे थे, जबकि दोनों माता-पिता वाले परिवारों में यह दर केवल 11 प्रतिशत थी।

आर्थिक तंगी के साथ-साथ एकल अभिभावक पर बच्चों की अकेले देखभाल और बिना भुगतान वाले घरेलू कार्यों का अत्यधिक दबाव रहता है। शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि ऐसे परिवारों के बच्चे न केवल बचपन में लंबे समय तक गरीबी झेलते हैं, बल्कि बड़े होने के बाद भी उनके आर्थिक संकट से बाहर निकलने की संभावना काफी कम रहती है।

वयस्क अवस्था में गरीबी बने रहने के मुख्य कारण

शोधकर्ताओं ने उन कारकों का भी विश्लेषण किया जो बचपन की गरीबी को बड़े होने तक बनाए रखते हैं। इनमें स्कूली शिक्षा के बाद उच्च योग्यता हासिल करने में कमी, नियमित रोजगार का अभाव, खराब स्वास्थ्य और जीवनसाथी के साथ रहने की कम संभावना शामिल है। अध्ययन में पाया गया कि अभाव में बड़े हुए युवाओं में स्वयं भी एकल अभिभावक बनने की संभावना अधिक पाई गई, जिससे आर्थिक चक्र दोहराता रहता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वयस्क नागरिकों में गरीबी दर को कम करने के लिए केवल रोजगार देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों वाले परिवारों और विशेष रूप से कम आय वाले एकल अभिभावक परिवारों को लक्षित कर सीधी आर्थिक सहायता देने वाली नीतियां बनानी होंगी, ताकि बचपन में ही इस चक्र को तोड़ा जा सके।

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