Quito News: प्रशांत महासागर में स्थित इक्वाडोर के गैलापागोस द्वीप समूह से विशालकाय नीली व्हेल की रहस्यमय गैर-मौजूदगी ने समुद्री जीव वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 तक चले नौ महीने के सघन खोज अभियान के बावजूद वैज्ञानिकों को एक भी व्हेल नहीं मिली। शोधकर्ताओं का मानना है कि प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो के कारण यह पारिस्थितिक बदलाव आया है।
प्रशांत महासागर स्थित गैलापागोस द्वीप समूह के आसपास से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के सबसे विशालकाय जीव नीली व्हेल (ब्लू व्हेल) अचानक गायब हो गई हैं। वैज्ञानिकों के एक विशेष दल ने लगातार नौ महीनों तक समुद्र में गहन खोज अभियान चलाया, लेकिन उन्हें एक भी नीली व्हेल देखने को नहीं मिली। यह अभियान अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच उन समुद्री क्षेत्रों में संचालित किया गया था, जो दशकों से नीली व्हेल का प्रमुख प्राकृतिक आवास रहे हैं।
वैज्ञानिक दल इन विशालकाय जीवों पर सैटेलाइट टैग लगाकर उनके प्रवास मार्ग (माइग्रेशन रूट) का वैज्ञानिक अध्ययन करना चाहता था, किंतु लंबी खोज के बाद भी सफलता नहीं मिल सकी। इस अप्रत्याशित परिस्थिति ने समुद्री वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों के समक्ष गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
9 महीने तक चला गहन समुद्री सर्वेक्षण अभियान
इस अभियान का नेतृत्व यूनिवर्सिटी सैन फ्रांसिस्को डी क्विटो के अंतर्गत आने वाले गैलापागोस साइंस सेंटर की शोधकर्ता डेनिएला अलारकोन कर रही थीं। उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने उन सभी समुद्री क्षेत्रों का व्यवस्थित सर्वेक्षण किया, जहां ऐतिहासिक रूप से नीली व्हेल नियमित रूप से दर्ज की जाती रही हैं। शोधकर्ताओं को उम्मीद थी कि व्यापक प्रयासों के बाद कुछ व्हेल अवश्य दिखाई देंगी।
डेनिएला अलारकोन के अनुसार, टीम ने बार-बार तलाशी अभियान चलाया, लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगा। स्थानीय निगरानी नेटवर्क से मिलने वाली सूचनाएं अगस्त और सितंबर 2025 से ही कम होने लगी थीं। इसके बाद मई और जून 2026 में व्हेल देखे जाने की अपुष्ट सूचनाएं मिलने पर गश्त और तेज की गई, फिर भी शोधकर्ताओं को एक भी व्हेल नजर नहीं आई। विशेषज्ञों का कहना है कि हंपबैक व्हेल की तरह नीली व्हेल तटों के पास नहीं आतीं, बल्कि इंसानी बस्तियों से दूर गहरे समुद्र में रहना पसंद करती हैं।
अल नीनो के प्रभाव से समुद्री तापमान में बदलाव
समुद्री वैज्ञानिकों का प्राथमिक आकलन है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो की सक्रियता के चलते इस पूरे क्षेत्र के समुद्री पर्यावरण में प्रतिकूल परिवर्तन आया है। अल नीनो के कारण समुद्र की ऊपरी सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो गया है, जिससे पानी के भीतर पोषक तत्वों का प्रवाह बाधित हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि गर्म पानी और भोजन की अनुपलब्धता के कारण नीली व्हेल संभवतः अनुकूल ठंडे जल वाले अन्य समुद्री क्षेत्रों की ओर विस्थापित हो गई हैं।