Belgium News: बेल्जियम में जारी गंभीर बजट संकट के बीच प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पांच दलों की गठबंधन सरकार में बजट पर सहमति न बनने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। हालांकि, राजा फिलिप ने अभी उनका इस्तीफा स्वीकार करने पर अंतिम फैसला नहीं लिया है और वे राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श करेंगे।
बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने लंबे समय से जारी बजट संकट के गहराने के बाद सोमवार को अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया। रूढ़िवादी फ्लेमिश समुदाय के राष्ट्रवादी नेता डी वेवर ने भारी कर्ज से जूझ रहे देश की आर्थिक समस्याओं को हल करने के संकल्प के साथ पदभार संभाला था। हालांकि, वह अपनी बजट योजनाओं पर पांच दलों वाली गठबंधन सरकार के सहयोगी दलों का समर्थन हासिल करने में असफल रहे।
बेल्जियम के रॉयल पैलेस ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि डी वेवर ने गठबंधन सरकार के भीतर बजट वार्ता विफल होने के बाद इस्तीफा दिया है। बेल्जियम में राष्ट्रीय सरकारों के गठन की प्रक्रिया की निगरानी करने वाले राजा फिलिप ने इस्तीफा स्वीकार करने या न करने पर अभी फैसला नहीं लिया है। दोनों नेताओं के बीच महल में लगभग एक घंटे तक बैठक चली।
राजनीतिक दलों से चर्चा करेंगे राजा फिलिप
शाही महल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि राजा इस बात पर खेद व्यक्त करते हैं कि ऐसा कोई समझौता नहीं हो सका, जिससे देश को एक विश्वसनीय बजट मिल सके और वह वर्तमान चुनौतियों का सामना कर पाए। राजा फिलिप मंगलवार से संसद के विभिन्न दलों के नेताओं के साथ विचार-विमर्श शुरू करेंगे। इस राजनीतिक मंथन के बाद वह शुक्रवार को महल में डी वेवर से दोबारा मुलाकात करेंगे। फरवरी 2025 में सत्ता में आए डी वेवर 31 दिसंबर से पहले वर्ष 2027 के बजट पर सहमति बनाने के लिए लगातार प्रयासरत थे।
बढ़ता कर्ज और रक्षा खर्च सरकार के लिए चुनौती
बेल्जियम यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों में सबसे अधिक कर्ज वाले देशों की सूची में शामिल है, जिसमें फ्रांस और इटली भी आते हैं। देश पर कर्ज का भार वर्षों से बढ़ रहा है, जिसे कोविड-19 महामारी और ऊर्जा संकट ने और अधिक गंभीर बना दिया। यूरोपीय आयोग के अनुमान के अनुसार, इस साल बेल्जियम का सरकारी कर्ज उसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 110 प्रतिशत तक पहुंचने की आशंका है। कर्ज पर लगातार बढ़ता ब्याज सरकार के लिए बड़ा वित्तीय दबाव बन चुका है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब देश अपने रक्षा बजट को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।