बांग्लादेश में वेतन वृद्धि को लेकर भड़का गारमेंट मजदूरों का आंदोलन, 500 फैक्ट्रियां बंद; 30 हजार टका न्यूनतम वेतन की मांग

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World News: बांग्लादेश में कम वेतन और बढ़ती महंगाई के विरोध में गारमेंट मजदूरों के उग्र प्रदर्शनों से औद्योगिक केंद्रों में संकट गहरा गया है। मीरपुर, अशुलिया, सावर और गाजीपुर में लगातार तीसरे दिन हिंसक झड़पों के बीच करीब 500 फैक्ट्रियों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। सरकार ने संकट से निपटने के लिए नया वेज बोर्ड गठित किया है, जबकि मजदूर वर्तमान 12,500 टका के न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 30,000 टका करने की मांग पर अड़े हैं।

बांग्लादेश में न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी और बढ़ती महंगाई से राहत की मांग को लेकर रेडीमेड गारमेंट क्षेत्र के श्रमिकों का आंदोलन तेज हो गया है। देश के प्रमुख औद्योगिक हब में लगातार तीसरे दिन उत्पादन ठप रहा, जिससे 38 अरब डॉलर के परिधान उद्योग पर गहरा संकट मंडराने लगा है। ढाका के मीरपुर औद्योगिक क्षेत्र सहित सावर, अशुलिया और गाजीपुर जैसे प्रमुख इलाकों में भारी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं।

शनिवार को भड़के विरोध प्रदर्शनों के बाद सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मद्देनजर लगभग 500 गारमेंट फैक्ट्रियों को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया गया है। सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारी श्रमिकों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले और साउंड ग्रेनेड का इस्तेमाल करना पड़ा, जिससे कई इलाकों में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

30,000 टका मासिक न्यूनतम वेतन की मांग पर अड़े श्रमिक

वर्तमान में बांग्लादेश में गारमेंट मजदूरों का न्यूनतम मासिक वेतन 12,500 टका है। आंदोलनकारी श्रमिक इसमें दोगुने से अधिक की बढ़ोतरी करते हुए इसे कम से कम 30,000 टका करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों के चलते वर्तमान वेतन में परिवार का भरण-पोषण करना असंभव हो गया है।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने रविवार को एक नए वेज बोर्ड (न्यूनतम वेतन बोर्ड) के गठन की घोषणा की, जो श्रमिकों के वेतन ढांचे की समीक्षा करेगा। इस बीच, प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने कैबिनेट मंत्रियों और वरिष्ठ सलाहकारों के साथ आपात बैठक कर औद्योगिक शांति बहाल करने के उपायों पर चर्चा की।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा और लागत के बीच फंसा 38 अरब डॉलर का उद्योग

यह गतिरोध ऐसे समय में सामने आया है जब बांग्लादेश का गारमेंट क्षेत्र वैश्विक बाजार में वियतनाम, कंबोडिया और भारत से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। परिधान निर्यात बांग्लादेश की विदेशी मुद्रा आय और रोजगार सृजन का सबसे बड़ा जरिया है।

फैक्ट्री मालिकों का कहना है कि उत्पादन लागत में वृद्धि, ऊर्जा संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग की कमी के कारण उद्योग पहले से ही वित्तीय दबाव में है। ऐसे में वेतन में भारी वृद्धि अचानक वहन करना संभव नहीं होगा।

वैश्विक स्तर पर सबसे कम वेतन का मुद्दा

बांग्लादेश गारमेंट एंड इंडस्ट्रियल वर्कर्स फेडरेशन के महासचिव और वेज बोर्ड में श्रमिकों के प्रतिनिधि बाबुल अख्तर ने कहा कि देश का यह क्षेत्र दुनिया में सबसे कम वेतन देने वाले उद्योगों में से एक बना हुआ है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि फैक्ट्री मालिक अपने श्रमिकों को सम्मानजनक और उचित पारिश्रमिक देने में असमर्थ हैं, तो उन्हें वैश्विक खरीदारों और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों से बेहतर कीमतों के लिए मोलभाव करना चाहिए। उद्योगों को कम वेतन पाने वाले श्रमिकों के शोषण के दम पर नहीं चलाया जा सकता।

Desh Raj
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