Dhaka News: बांग्लादेश में न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर कपड़ा उद्योग के श्रमिकों का आंदोलन उग्र हो गया है। राजधानी ढाका के मीरपुर इलाके में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें हुईं, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले और साउंड ग्रेनेड दागे। इस गतिरोध और हिंसा के चलते देश भर की 264 फैक्ट्रियों में कामकाज ठप हो गया है।
बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग के कर्मचारियों का वेतन संशोधन को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले चुका है। राजधानी ढाका के मीरपुर इलाके में मंगलवार को प्रदर्शनकारी श्रमिकों और पुलिस के बीच लगातार तीसरे दिन गंभीर टकराव देखने को मिला। स्थिति बेकाबू होने पर पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले और साउंड ग्रेनेड का प्रयोग करना पड़ा। इस तनाव के चलते क्षेत्र की प्रमुख सड़कों पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और सुरक्षा कारणों से एक नजदीकी मेट्रो स्टेशन को भी अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।
मंगलवार सुबह करीब सवा दस बजे मीरपुर-11 इलाके में उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब पुलिसकर्मियों ने सड़क जाम कर रहे श्रमिकों को हटाने का प्रयास किया। इसके बाद प्रदर्शनकारी आसपास की गलियों से बाहर निकल आए और पुलिस बल पर ईंट-पत्थर फेंकने लगे। सुबह से ही महिला और पुरुष कर्मचारी अपनी-अपनी इकाइयों से निकलकर सड़कों पर एकत्र होने लगे थे, जिससे काफी देर तक पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
30 हजार टका मासिक वेतन और ब्लैकलिस्टिंग खत्म करने की मांग
सड़कों पर उतरे श्रमिकों की मुख्य मांग है कि उनका न्यूनतम मासिक वेतन बढ़ाकर 30 हजार टका तय किया जाए। इसके साथ ही वे बिना उचित प्रक्रिया के कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने पर रोक लगाने और श्रमिकों को ब्लैकलिस्ट करने की व्यवस्था समाप्त करने पर अड़े हैं।
अब तक पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई इन झड़पों में कम से कम 10 लोगों के घायल होने की सूचना है। दूसरी ओर, हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की आशंका के चलते देश भर की 264 कपड़ा फैक्ट्रियों में उत्पादन बंद करना पड़ा है। ढाका के अलावा गाजीपुर, सावर-अशुलिया और नारायणगंज जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में भी हजारों श्रमिकों ने सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराया है।
सरकार ने बनाया वेतन बोर्ड, काम पर लौटने की अपील
आंदोलन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सरकार ने न्यूनतम वेतन की समीक्षा के लिए छह सदस्यीय वेतन बोर्ड गठित करने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि श्रमिकों के वैध हितों की रक्षा की जाए, लेकिन साथ ही राष्ट्रीय निर्यात को ध्यान में रखते हुए उत्पादन भी जारी रहना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
श्रम एवं रोजगार मंत्री अरिफुल हक चौधरी ने प्रदर्शन कर रहे सभी श्रमिकों से शांति बनाए रखने और तत्काल काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वेतन से संबंधित सभी मांगों पर नवगठित बोर्ड के जरिए विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। चूंकि बांग्लादेश की पूरी अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार काफी हद तक कपड़ा निर्यात पर टिका हुआ है, इसलिए कारखानों में लंबा गतिरोध व्यापारिक संकट को गहरा कर सकता है।