Agra News: दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल को टूरिस्ट्स की भारी भीड़ से बचाने के लिए नई प्लानिंग हो रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने ताज महल की कैरिंग कैपेसिटी तय करने का काम आईआईटी दिल्ली को दिया है। इस स्टडी से तय होगा कि एक समय में कितने टूरिस्ट्स को एंट्री मिलेगी।
आईआईटी दिल्ली की टीम ताजमहल में टूरिस्ट्स के मूवमेंट की डिटेल स्टडी करेगी। इस दौरान एंट्री और एग्जिट रूट, टिकटिंग सिस्टम और सिक्योरिटी चेकिंग का एनालिसिस होगा। टीम देखेगी कि अलग-अलग लोकेशंस पर भीड़ का कितना प्रेशर रहता है। हर घंटे कितने टूरिस्ट्स को अंदर जाने की परमिशन मिले, इसका साइंटिफिक असेसमेंट किया जाएगा।
पीक सीजन, संडे और पब्लिक हॉलिडे के दिन भीड़ को कंट्रोल करने के लिए अलग टाइम स्लॉट बनाने पर विचार होगा। इसके अलावा फेज वाइज टिकटिंग सिस्टम लागू करने की जरूरत का भी स्टडी किया जाएगा। यह स्टडी सिर्फ टूरिस्ट्स के नंबर्स तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मार्बल और पच्चीकारी पर भीड़ के असर को भी परखेगी।
ताजमहल के मार्बल पर पड़ने वाले असर का होगा असेसमेंट
टूरिस्ट्स की संख्या बढ़ने से पैदा होने वाली ह्यूमिडिटी और एनवायरनमेंट में होने वाले बदलावों का भी असेसमेंट किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि हिस्टोरिकल मॉन्यूमेंट को इससे कितना नुकसान हो रहा है। एएसआई की सुपरिटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट के मुताबिक, आईआईटी दिल्ली से स्टडी कराने का प्रोसेस पूरा हो गया है और बजट अप्रूवल के लिए भेजा गया है।
टीम बहुत जल्द अपनी स्टडी शुरू करेगी। रिपोर्ट मिलने के लगभग छह महीने के अंदर नया सिस्टम लागू करने की तैयारी है। इससे पहले साल 2015 में भी नीरी ने भीड़ मैनेजमेंट को लेकर स्टडी की थी। तब नीरी ने एक साथ करीब नौ हजार टूरिस्ट्स की लिमिट और हर घंटे छह हजार की एंट्री का सजेशन दिया था।
नीरी ने डिजिटल डिस्प्ले और फेज वाइज टिकटिंग सिस्टम की रिकमेंडेशन भी की थी। अब करीब दस साल बाद टूरिस्ट्स की बढ़ती संख्या और सिक्योरिटी सिस्टम को देखते हुए नए स्टैंडर्ड तय किए जाएंगे। इस नई रिपोर्ट के बाद ताजमहल में टूरिस्ट्स को साइंटिफिक बेस पर कंट्रोल करने का एक बेहतर इकोसिस्टम तैयार होगा।