Noida News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के मामले में 25 वर्षीय रुचिका सिंह पर जीरो एफआईआर दर्ज हुई है। अब टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए इसे बदले की भावना से उठाया गया कदम बताया है।
महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि एक युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ सरकारी तंत्र का इस तरह दुरुपयोग करना शर्मनाक है। इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने भी पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल खड़े किए थे। सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि अभद्र भाषा पर आपराधिक केस दर्ज करना गलत है।
गाजियाबाद की निवासी की शिकायत पर नोएडा में दर्ज हुई जीरो एफआईआर
पुलिस के अनुसार, नोएडा के सेक्टर 168 में रहने वाली रुचिका सिंह के खिलाफ गाजियाबाद की निवासी स्मृति सिंह की शिकायत पर केस दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि 23 जुलाई को जंतर-मंतर पर दिए गए बयान से संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची और शांति भंग करने की कोशिश की गई।
अपर पुलिस उपायुक्त मनीषा सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत मामला दर्ज हुआ है। चूंकि यह घटना दिल्ली के क्षेत्राधिकार में आती है, इसलिए जीरो एफआईआर दर्ज कर इसे आगे की जांच के लिए दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर किया जा रहा है।
पेपर लीक के खिलाफ 26 दिनों तक चला था छात्रों का विरोध प्रदर्शन
जीरो एफआईआर एक ऐसा कानूनी प्रावधान है जिसके तहत क्षेत्राधिकार की परवाह किए बिना किसी भी थाने में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इसके बाद मामले को संबंधित पुलिस स्टेशन भेज दिया जाता है। जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में चल रहा छात्रों का आंदोलन 25 जुलाई को समाप्त हुआ था।
इस आंदोलन के दौरान शिक्षाविद् सोनम वांगचुक भी 26 दिनों की भूख हड़ताल पर बैठे थे। संसद मार्च और बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद स्थिति को देखते हुए 20 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। फिलहाल पुलिस मामले के कानूनी पहलुओं की जांच कर रही है।