South Kannada News: देश में ‘ब्रिज मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर पद्म श्री गिरीश भारद्वाज का 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने अपने जीवनकाल में देश के दुर्गम ग्रामीण इलाकों में 140 से ज्यादा सस्पेंशन फुटब्रिज बनाकर लाखों लोगों की राह आसान की थी।
किसानों की सेवा से शुरू हुआ इंजीनियरिंग का सफर
मई 1950 में जन्मे भारद्वाज ने 1973 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। पिता की सलाह पर उन्होंने कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर ग्रामीण इलाकों में काम करने का फैसला लिया। शुरुआती दिनों में उन्होंने एग्रो सर्विस सेंटर और इंजीनियरिंग वर्कशॉप खोलकर किसानों के लिए पंप सेट और बायोगैस प्लांट पर काम किया।
ग्रामीणों की मदद से इत्तेफाकन बना पहला सस्पेंशन ब्रिज
पुल निर्माण का सफर साल 1989 में अचानक शुरू हुआ, जब ग्रामीणों ने पयस्वनी नदी पार करने के लिए उनसे मदद मांगी। नदी पर औपचारिक विशेषज्ञता न होने के बावजूद उन्होंने तकनीकी सूझबूझ और स्थानीय सहयोग से पहला हैंगिंग फुटब्रिज तैयार किया। यह सफलता उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई।
140 से ज्यादा पुल बनाकर दूर-दराज गांवों को जोड़ा
अगले तीन दशकों में उन्होंने कर्नाटक, केरल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में 140 से अधिक हैंगिंग फुटब्रिज तैयार किए। इनमें से लगभग 120 पुल दूर-दराज के गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए बनाए गए। ये पुल बेहद किफायती, मजबूत और कम समय में तैयार होने वाले थे।
पद्म श्री से सम्मानित भारद्वाज ने 76 वर्ष में ली अंतिम सांस
ग्रामीण कनेक्टिविटी में बेमिसाल योगदान के लिए भारत सरकार ने साल 2017 में उन्हें पद्म श्री से नवाजा था। 7 जुलाई 2026 को उनके निधन के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। राजनेताओं से लेकर आम ग्रामीणों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके योगदान को याद किया।