Delhi News: नई दिल्ली के भारत मंडपम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर का आयोजन हुआ। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुए इस मंथन में हिमाचल प्रदेश ने तीन महत्वपूर्ण नीतिगत सुझाव रखे हैं।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह शिविर केवल औपचारिकता न रहे, बल्कि जमीनी समस्याओं का पक्का समाधान निकाले। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के विजन को याद करते हुए बताया कि इस योजना से अब तक 8.50 लाख किलोमीटर सड़कें बन चुकी हैं।
बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री कमलेश पासवान, सचिव रोहित कंसल और कई विशेषज्ञ शामिल हुए। हिमाचल की तरफ से पीएमजीएसवाई के एक्सईएन डीके नाग ने प्रदेश का पक्ष रखा। हिमाचल के दिए सुझावों को पीएमजीएसवाई-5 की आगामी गाइडलाइन में शामिल किए जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
पहला सुझाव ठेकेदारी प्रथा में बड़े सुधार को लेकर है। राज्य ने मांग की कि एक ठेकेदार को एक समय में दो से ज्यादा काम न दिए जाएं। कांगड़ा में खराब गुणवत्ता के कारण पांच काम रद्द होने का उदाहरण देते हुए बताया गया कि एकाधिकार खत्म होने से प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ी है।
दूसरा सुझाव ड्रेनेज नीति को डीपीआर का अनिवार्य हिस्सा बनाने का है। हिमाचल में खराब ड्रेनेज से 2023 में 2400 करोड़ और 2025 में 3000 करोड़ का नुकसान हुआ था। इसे देखते हुए सड़क निर्माण से पहले हाइड्रोलाजिकल सर्वे के आधार पर पक्की नाली बनाने को अनिवार्य करने की मांग की गई है।
तीसरा सुझाव सड़क हादसों को रोकने के लिए बजट के प्रावधान से जुड़ा है। हिमाचल ने प्रस्ताव दिया कि एक करोड़ से अधिक लागत वाली हर सड़क में कुल राशि का एक प्रतिशत हिस्सा रोड सेफ्टी (साइन बोर्ड, पैरापिट और क्रैश बैरियर) पर अनिवार्य रूप से खर्च किया जाए।