पापांकुशा एकादशी पर करें भगवान विष्णु की विशेष पूजा, घोर पापों से मुक्ति और मिलता है परम पुण्य

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National News: हिंदू धर्म में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व माना जाता है। इस पावन तिथि को पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि यह पावन व्रत मनुष्य के सभी संचित पापों पर अंकुश लगाकर अंत में मोक्ष और विष्णु लोक दिलाता है।

पौराणिक शास्त्रों के अनुसार, पापांकुशा एकादशी का व्रत रखने से हजार अश्वमेघ यज्ञ और सौ सूर्य यज्ञ करने जितना पुण्य फल मिलता है। जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से उपवास रखते हैं और रात्रि जागरण करते हैं, उन्हें सीधे भगवान श्री हरि विष्णु के परम धाम में स्थान प्राप्त होता है।

पितरों की 30 पीढ़ियों का उद्धार करता है यह पावन व्रत

शास्त्रों में बताया गया है कि इस व्रत के प्रभाव से केवल साधक का ही नहीं, बल्कि उसके पूरे कुल का कल्याण होता है। यह पावन व्रत रखने से मातृपक्ष, पितृपक्ष और पत्नी पक्ष की दस-दस पीढ़ियों का उद्धार हो जाता है। यही कारण है कि इसे सबसे कल्याणकारी व्रतों में गिना जाता है।

पूजा के लिए घर की उत्तर-पूर्व दिशा में सफेद वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की तस्वीर स्थापित करें। पीतल के कलश में जल, दूध, सुपारी, तिल और सिक्का डालकर उस पर नारियल रखें। भगवान को तिल के तेल का दीपक, चंदन, नीले फूल और 11 केलों का भोग लगाकर विशेष मंत्र का जाप करें।

दान का विशेष महत्व और क्रूर बहेलिए के उद्धार की कथा

पापांकुशा एकादशी पर ब्राह्मणों को वस्त्र, अन्न, तिल, जूते, छाता, सोना और गौ दान करना बेहद शुभ माना गया है। दान देते समय यथासंभव दक्षिणा अवश्य दें और मन में अहंकार न आने दें। सही विधि और निस्वार्थ भाव से किया गया दान साधक के जीवन के सभी कष्ट दूर करता है।

पौराणिक कथा के अनुसार विंध्याचल पर्वत पर क्रोधन नाम का क्रूर बहेलिया रहता था। उसने जीवन भर केवल पाप किए थे। मृत्यु निकट देखकर वह भयभीत होकर ऋषि अंगिरा की शरण में पहुंचा। ऋषि के निर्देश पर उसने इस एकादशी का व्रत किया, जिससे पापमुक्त होकर उसे सीधे मोक्ष मिल गया।

Desh Raj
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