New Delhi News: भारतीय जनता पार्टी द्वारा राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची से केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और सामाजिक न्याय व अधिकारिता राज्यमंत्री बीएल वर्मा का नाम काटने के बाद केंद्रीय कैबिनेट में बड़े फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। दोनों नेताओं का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है।
चार महीनों में घट सकती है पांच मंत्रियों की संख्या
संसद का सदस्य न रहने की स्थिति में दोनों नेताओं को केंद्रीय मंत्रिमंडल छोड़ना पड़ेगा। इन दोनों मंत्रियों के हटने के बाद पिछले चार महीनों में कैबिनेट से कुल पांच चेहरे कम हो जाएंगे। इससे पहले रवनीत बिट्टू, जॉर्ज कुरियन और धर्मेंद्र प्रधान भी अलग-अलग राजनीतिक कारणों से मंत्रिमंडल से बाहर हो चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के इस फैसले से कैबिनेट विस्तार की राह खुल गई है। वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी को पहले ही उत्तर प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा चुका है। अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन पर अंतिम सहमति बनते ही खाली हुए पदों पर नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं।
आगामी चुनावों को देखते हुए संगठन और युवाओं को तरजीह संभव
माना जा रहा है कि मोदी सरकार 3.0 का यह फेरबदल 2029 के आम चुनाव की रणनीति को ध्यान में रखकर किया जाएगा। संगठन में जमीनी स्तर पर काम करने वाले युवा नेताओं को टीम में आगे लाने की पूरी तैयारी है। हालिया संगठनात्मक नियुक्तियों और टिकट वितरण में भी इस बदलाव का स्पष्ट प्रभाव दिखा है।
लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण एक अहम विषय रहने की संभावना है, इसलिए फेरबदल में महिला चेहरों की हिस्सेदारी बढ़ाई जा सकती है। पार्टी नेतृत्व क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समीकरणों को साधते हुए अनुभवी कार्यकर्ताओं को सरकार में नई जिम्मेदारी सौंपकर संगठन और सत्ता के बीच तालमेल मजबूत करना चाहता है।