Delhi News: कांग्रेस ने अरुणाचल प्रदेश सीमा पर चीन के साथ तनाव की खबरों को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। मुख्य विपक्षी दल ने कहा कि देश को सुरक्षा पर स्पष्ट जवाब चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद और देश को विश्वास में लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव जयराम रमेश ने आईटीबीपी के महानिदेशक के हालिया बयान का हवाला दिया। इसमें उन्होंने कहा था कि चीन से पारंपरिक युद्ध का समय बीत चुका है। इसी कारण बल अपने जवानों, आधुनिक हथियारों, वाहनों और सीमा चौकियों को अपग्रेड करने में भारी निवेश कर रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा पर गश्त को लेकर सवाल
मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि क्या डोकलाम और गलवान के बाद फिर तनाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगस्त में ताकसिंग के पास चीनी घुसपैठ की खबर आई थी। कोर कमांडर स्तर की बातचीत के बावजूद कथित टकराव जारी है और गश्त की पहुंच पर असर पड़ा है।
खरगे ने व्यापार घाटे पर चिंता जताते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 के बाद चीन से आयात काफी बढ़ा है। उन्होंने दावा किया कि व्यापार घाटा 112.16 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। सेना पर पूरा भरोसा जताते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार की जवाबदेही तय होनी जरूरी है।
व्यापार घाटे और आर्थिक निर्भरता पर सरकार को घेरा
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सीमा पर विवाद के बावजूद सरकार चीन को लगातार रियायतें दे रही है। उन्होंने चीन की 60,000 मेगावाट बांध परियोजना और स्थानों के नाम बदलने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड व्यापार घाटे से देश के छोटे उद्योगों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है।
जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री के पुराने बयानों और पूर्व सैन्य अधिकारियों की टिप्पणियों का भी उल्लेख किया। कांग्रेस के मीडिया विभाग प्रमुख पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार सीमा प्रबंधन में विफल रही है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील मुद्दों पर चुप्पी साधने के बजाय प्रधानमंत्री को आगे आकर देश को सच बताना चाहिए।