Patna News: मोकामा से विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट से मिली उनकी जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। मृतक के पोते नीरज कुमार की इस याचिका पर शीर्ष अदालत 30 अक्टूबर को सुनवाई करेगी। यदि अदालत जमानत रद्द करती है, तो अनंत सिंह को दोबारा जेल जाना पड़ सकता है।
बिहार के मोकामा से विधायक अनंत सिंह की कानूनी और राजनीतिक मुश्किलें लगातार गहराती नजर आ रही हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट द्वारा उन्हें दी गई जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस मामले पर शीर्ष अदालत में 30 अक्टूबर को सुनवाई निर्धारित है। यदि अदालत ने उनकी जमानत खारिज कर दी, तो उन्हें एक बार फिर जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ सकता है।
यह कानूनी चुनौती ऐसे समय में सामने आई है जब राजनीतिक स्तर पर भी अनंत सिंह दबाव का सामना कर रहे हैं। विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अधिकृत प्रत्याशी नीरज कुमार का विरोध करने के चलते पार्टी ने उन्हें छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया है। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को उनकी विधायकी समाप्त करने की मांग को लेकर पत्र भी सौंपा गया। वहीं, प्रशासन ने उनकी पत्नी नीलम देवी को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस भी जारी किया है।
दुलारचंद यादव के पोते ने दायर की याचिका
दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2026 को अनंत सिंह को नियमित जमानत दी थी, जिसके बाद 23 मार्च 2026 को वे जेल से रिहा हुए थे। अब दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इसी विशेष अनुमति याचिका पर 30 अक्टूबर को सुनवाई होनी है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
यह घटनाक्रम वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान का है। अक्टूबर 2025 में मोकामा के टाल इलाके में दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। दुलारचंद यादव उस समय जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में चुनाव प्रचार कर रहे थे। प्रचार के दौरान ही उनका आमना-सामना अनंत सिंह के काफिले से हुआ था, जिसके बाद यह हिंसक घटना घटी। इलाके में दुलारचंद यादव की पहचान एक पुराने दबंग के रूप में थी।
जेल में रहते हुए जीता था विधानसभा चुनाव
हत्याकांड में नाम सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 1 नवंबर 2025 को अनंत सिंह को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में पटना की बेऊर जेल भेज दिया गया। जेल में बंद रहने के दौरान ही उन्होंने जेडीयू के टिकट पर मोकामा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर दोबारा विधायक बने। करीब चार महीने न्यायिक हिरासत में रहने के बाद मार्च 2026 में हाईकोर्ट से राहत मिलने पर उनकी रिहाई संभव हो सकी थी।
2015 से अदालती मामलों का लंबा सिलसिला
अनंत सिंह का कानूनी विवादों और जेल जाने का इतिहास पुराना रहा है। जून 2015 में पुटुस यादव हत्याकांड के सिलसिले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। उस दौरान उन्होंने जेल में बंद रहते हुए ही निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता था और बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।
इसके बाद अगस्त 2019 में पुलिस ने उनके पैतृक आवास पर छापेमारी कर एक एके-47 राइफल, भारी मात्रा में कारतूस और दो हैंड ग्रेनेड बरामद किए थे। इस मामले में दिल्ली की एक अदालत में आत्मसमर्पण के बाद उन्हें जेल भेजा गया था। जून 2022 में विशेष अदालत ने इस मामले में उन्हें 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई, जिसके चलते उनकी विधानसभा सदस्यता भी रद्द हो गई थी। हालांकि, अगस्त 2024 में पटना हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में निचली अदालत का फैसला पलटते हुए उन्हें बरी कर दिया था।
गोलीबारी मामले में भी हुई थी गिरफ्तारी
जनवरी 2025 में मोकामा के नौरंगा-जालालपुर क्षेत्र में हुए गोलीबारी के एक विवाद में भी अनंत सिंह का नाम सामने आया था। इसके बाद उन्होंने अदालत में आत्मसमर्पण किया और उन्हें बेऊर जेल भेजा गया। करीब सात महीने जेल में रहने के बाद अगस्त 2025 में पटना हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिली थी। इसके कुछ ही महीनों बाद अक्टूबर 2025 में दुलारचंद यादव हत्याकांड का मामला दर्ज हुआ।
अब 30 अक्टूबर को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई यह तय करेगी कि मोकामा विधायक बाहर रहेंगे या उन्हें दोबारा न्यायिक हिरासत में जाना होगा। अदालत के अंतिम निर्णय पर ही उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत भविष्य की दिशा तय होगी।