इसरो के निजीकरण की खबरों पर अंतरिक्ष एजेंसी का बड़ा स्पष्टीकरण, भविष्य की भूमिका पर कही यह बात

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National News: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने निजीकरण की सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। रविवार को जारी बयान में इसरो ने साफ किया कि न तो उसका निजीकरण होगा और न ही उसका महत्व कम किया जाएगा। निजी क्षेत्र का सहयोग एजेंसी को मजबूत बनाएगा।

इसरो ने स्पष्ट किया कि निजी कंपनियों की भागीदारी से संस्थान को नए अनुसंधानों पर ध्यान लगाने की पूरी छूट मिलेगी। अंतरिक्ष एजेंसी डीप स्पेस मिशन, मानव अंतरिक्ष उड़ान और नई पीढ़ी के लॉन्च व्हीकल जैसे रणनीतिक प्रोजेक्ट्स पर अपनी वैज्ञानिक क्षमता को पूरी ताकत से केंद्रित करेगी।

कर्मचारी संघों के पत्र के बाद सामने आया आधिकारिक बयान

यह स्पष्टीकरण तब आया जब इसरो के 9 कर्मचारी संघों ने चेयरमैन वी. नारायणन को पत्र लिखा था। कर्मचारियों ने इन-स्पेस चेयरमैन पवन गोयनका के उस बयान पर आपत्ति जताई थी, जिसमें उन्होंने रॉकेट निर्माण का काम निजी कंपनियों या सार्वजनिक उपक्रमों को सौंपने की बात कही थी।

कर्मचारी यूनियनों का तर्क था कि इसरो की तकनीक देश की अमूल्य राष्ट्रीय धरोहर है। इसका हस्तांतरण पारदर्शी और सुरक्षा नियमों के तहत होना चाहिए। इन चिंताओं के सामने आने के बाद इन-स्पेस चेयरमैन ने भी सोशल मीडिया पर सफाई देकर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया।

चंद्रमा मिशन और 2035 के स्पेस स्टेशन पर रहेगा फोकस

पवन गोयनका ने कहा कि इसरो भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र की रीढ़ बना रहेगा और यह कमजोर नहीं होगा। वर्ष 2030 तक सालाना 50 रॉकेट लॉन्च का लक्ष्य पाने के लिए निजी क्षेत्र का साथ बेहद जरूरी है। इंडस्ट्री केवल नियमित रॉकेट और सैटेलाइट्स का बड़े पैमाने पर उत्पादन करेगी।

इस नई व्यवस्था से इसरो वर्ष 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय मानव मिशन भेजने की तैयारियों में जुटेगा। इसके साथ ही एडवांस्ड सेंसर, प्रोपल्शन तकनीक और दोबारा उपयोग में आने वाले रॉकेट्स का विकास एजेंसी की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

Desh Raj
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