World News: स्वीडन में एक महिला द्वारा पुराने सामान के बाजार से बेहद कम दाम में खरीदी गई मशाल इतिहास का नायाब हिस्सा निकली। 1956 के ओलंपिक खेलों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई यह दुर्लभ मशाल नीलामी में 1.31 करोड़ रुपये से अधिक की रिकॉर्ड कीमत पर बिकी है।
पुराने सामान के बाजारों में अक्सर लोग सामान्य घरेलू चीजें तलाशते हैं, लेकिन कई बार वहां छिपी ऐतिहासिक धरोहरें तकदीर बदल देती हैं। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला स्वीडन में सामने आया है, जहां एक महिला द्वारा कबाड़ी बाजार से खरीदी गई साधारण सी दिखने वाली मशाल ने नीलामी में करोड़ों का मूल्य हासिल किया।
महिला ने पुराने सामान की तलाश के दौरान एक मशाल पसंद आने पर उसे बिना किसी विशेष जानकारी के खरीद लिया था। बाद में जांच के दौरान पता चला कि यह 1956 के ओलंपिक खेलों के लिए तैयार की गई बेहद दुर्लभ मशाल है। एल्युमीनियम से बनी इस ऐतिहासिक मशाल की लंबाई 41 सेंटीमीटर और वजन लगभग आधा किलोग्राम है। ऐतिहासिक रूप से यह मशाल इतनी दुर्लभ है कि वर्तमान में दुनिया भर में इसके 10 से भी कम नमूने मौजूद हैं।
1956 ओलंपिक और घुड़सवारी प्रतियोगिता से जुड़ा इतिहास
इस मशाल का संबंध 1956 में आयोजित मेलबर्न ओलंपिक खेलों से है। उस समय ऑस्ट्रेलिया के कड़े पशु संगरोध (क्वारंटीन) नियमों के चलते घोड़ों से जुड़ी घुड़सवारी (इक्वेस्ट्रियन) प्रतियोगिताएं मेलबर्न में आयोजित नहीं की जा सकी थीं। इस कारण घुड़सवारी के आयोजनों को मुख्य खेलों से अलग स्वीडन के स्टॉकहोम में आयोजित किया गया था।
इसी विशेष प्रतियोगिता के उपलक्ष्य में यह मशाल तैयार की गई थी। हालांकि, ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, खेल आयोजन के दौरान इसका आधिकारिक तौर पर कभी उपयोग नहीं किया गया। बाद में इसे दीवार पर टांगने वाली सजावटी वस्तु (वॉल लैंप) में बदल दिया गया था, जो समय के साथ कबाड़ी बाजार तक पहुंच गई।
2 लाख के अनुमान के मुकाबले मिली रिकॉर्ड बोली
नीलामी घर ने प्रारंभिक मूल्यांकन के आधार पर इस मशाल की अनुमानित कीमत करीब 2 लाख रुपये आंकी थी। लेकिन जैसे ही अंतरराष्ट्रीय संग्राहकों और खरीदारों को इसकी ऐतिहासिक अहमियत और दुर्लभता की जानकारी हुई, बोली तेजी से बढ़ती चली गई।
नीलामी के दौरान अंतिम बोली 1.31 करोड़ रुपये से भी अधिक पहुंच गई, जिसने संबंधित नीलामी घर में बिकने वाली कई प्रमुख वस्तुओं के पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए।