उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्यों के 2647 पदों पर भर्ती अटकी, अर्हता पर फंसा पेच

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Prayagraj News: उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्यों के 1475 और प्रधानाध्यापकों के 1172 पदों पर भर्ती के लिए अधियाचन मिलने के बाद भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है। नए आयोग द्वारा भर्ती के लिए योग्यता और अर्हता तय न होने से यह मामला फिलहाल अटका हुआ है।

वर्ष 2013 की पिछली भर्ती केवल साक्षात्कार के आधार पर हुई थी। शिक्षक संगठनों की मांग के बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अब लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के जरिए पारदर्शी चयन का निर्णय लिया है। नवगठित शिक्षा सेवा चयन आयोग ने अर्हता निर्धारण के लिए शासन को पत्र भेजा है।

प्रधानाचार्य पद के लिए योग्यता के नए प्रस्ताव पर विचार जारी

आयोग के प्रस्ताव के अनुसार प्रधानाचार्य पद के लिए स्नातकोत्तर, बीएड और 4 साल का अनुभव अनिवार्य करने की बात कही गई है। आवेदक की न्यूनतम आयु 30 वर्ष होनी चाहिए। साथ ही आवेदक केंद्र या राज्य सरकार के कोष अथवा अनुदान से वेतन प्राप्त कर रहा हो।

वहीं शिक्षा निदेशालय ने प्रधानाध्यापक भर्ती में प्रवक्ता के बजाय जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापकों को शामिल करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा बिना सरकारी अनुदान वाले योग्य अभ्यर्थियों को भी मौका देने का प्रस्ताव भेजा गया है, जिस पर अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है।

बालिका स्कूल में पुरुष प्रधानाचार्य की तैनाती पर राजकीय शिक्षक संघ ने जताई आपत्ति

राजकीय बालिका इंटर कॉलेज धनूपुर में पुरुष प्रधानाचार्य कैलाश यादव की तैनाती का राजकीय शिक्षक संघ ने विरोध किया है। संघ के पदाधिकारियों ने अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर बालिका विद्यालयों में महिला और बालक विद्यालयों में केवल पुरुष प्रधानाचार्य की तैनाती करने की मांग की है।

शिक्षक संघ ने हाल ही में जारी तबादला सूची की विसंगतियों को दूर करने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही चित्रकूट के मानिकपुर और अमेठी के मुसाफिरखाना स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेजों में बीते कई वर्षों से खाली पड़े पदों पर नियमित प्रधानाचार्यों की तुरंत नियुक्ति करने की अपील की है।

Desh Raj
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