Solan News: हिमाचल प्रदेश के सोलन शहर में प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। एक तरफ आम जनता पानी की बूंद-बूंद को तरस रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी विभागों सहित 1,383 उपभोक्ताओं पर पानी के करीब 3.02 करोड़ रुपये के बिल पेंडिंग हैं।
नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, 3.02 करोड़ रुपये के कुल बकाये में से शहर के 46 सरकारी कार्यालयों पर ही 1.22 करोड़ रुपये पेंडिंग हैं। बाकी 1.80 करोड़ रुपये की देनदारी आम और कमर्शियल उपभोक्ताओं पर बकाया है। इसके बावजूद सरकारी दफ्तरों में जलापूर्ति जारी रही।
डीसी ऑफिस पर 50 लाख और अस्पताल पर 32 लाख का बिल
बकायेदारों की सूची में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सबसे आगे हैं। अकेले डीसी ऑफिस पर 50,45,702 रुपये का पानी का बिल पेंडिंग है। इसी तरह जोनल अस्पताल सोलन पर 32,02,316 रुपये का बकाया है, जबकि गर्ल्स प्राइमरी स्कूल पर 2,70,270 रुपये बकाया हैं।
अन्य प्रमुख बकायेदारों में ओल्ड डीसी ऑफिस पर 2,25,614 रुपये, रेलवे पर 2,53,954 रुपये और स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज पर 2,32,778 रुपये का बिल बकाया है। इन आंकड़ों ने वितरण और वसूली का काम संभालने वाली नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निगम की दोहरी नीति पर उठे सवाल, मेयर ने दी चेतावनी
शहर में जब किसी आम नागरिक का 1,000 से 2,000 रुपये का बिल पेंडिंग होता है, तो उसे तुरंत नोटिस भेज दिया जाता है। इसके विपरीत, लाखों रुपये का बिल दबाए बैठे सरकारी कार्यालयों की पानी की सप्लाई बिना किसी रुकावट के सालों से जारी रही।
इस मामले में सोलन नगर निगम की मेयर सुषमा शर्मा ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि 2,000 रुपये से अधिक का बिल पेंडिंग रखने वाले सभी उपभोक्ताओं और सरकारी कार्यालयों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। समय पर बिल जमा न करने पर कनेक्शन काट दिए जाएंगे।