Sirmaur News: हिमाचल प्रदेश के वन्यजीव प्रेमियों का 11 साल का लंबा इंतजार रविवार को खत्म हो गया। सिरमौर स्थित श्री रेणुका जी चिड़ियाघर में एक बार फिर रॉयल बंगाल टाइगर दहाड़ेंगे। महाराष्ट्र के नागपुर स्थित गोरेवाड़ा टाइगर रेस्क्यू सेंटर से बाघों का एक जोड़ा यहां सुरक्षित पहुंच चुका है।
यह जोड़ा करीब 1900 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर रविवार दोपहर एक बजे रेणुका जी पहुंचा। इस जोड़े में पांच साल का नर और तीन साल की मादा बाघ शामिल हैं। विशेष पिंजरों, पशु चिकित्सकों और सुरक्षा कर्मियों से लैस सात सदस्यीय विशेष टीम इन दोनों को नागपुर से यहां लेकर आई।
विशेष सुरक्षा और डॉक्टरों की निगरानी में हुआ सफर
इस पूरे अभियान का नेतृत्व शिमला वन्यजीव प्रभाग के डीसीएफ डॉक्टर शहनवाज ने किया। वन्यप्राणी वृत्त शिमला दक्षिण की अरण्यपाल प्रीति भंडारी ने बताया कि बाघों के प्राकृतिक व्यवहार को ध्यान में रखते हुए 1.67 करोड़ रुपये की लागत से नया एनक्लोजर, वाटर पूल, नाइट शेल्टर और मजबूत सुरक्षा दीवारें तैयार की गई हैं।
वन विभाग का मानना है कि बाघों के आगमन से रेणुका जी अब केवल धार्मिक आस्था और पवित्र झील तक सीमित नहीं रहेगा। यह कदम हिमाचल प्रदेश के वन्यजीव पर्यटन को नई ऊंचाइयां देगा और यह चिड़ियाघर प्रदेश के वाइल्डलाइफ पर्यटन मानचित्र पर पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र बनकर उभरेगा।
जंगली मुर्गे के बदले मिला बाघों का जोड़ा
यह प्रक्रिया किसी प्रकार की खरीद-फरोख्त नहीं, बल्कि औपचारिक वन्यजीव आदान-प्रदान कार्यक्रम का हिस्सा है। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से अगस्त 2026 में इसकी आधिकारिक मंजूरी मिली थी। इस समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश ने रेड जंगल फाउल यानी जंगली मुर्गे का जोड़ा दिया, जिसके बदले में राज्य को यह बाघों का जोड़ा मिला।
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