New Delhi News: विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अजरबैजान दौरे से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। पूर्व में रहे तनाव और मतभेदों को पीछे छोड़ते हुए भारत और अजरबैजान अब व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक स्तर पर नए सिरे से साझेदारी को मजबूत करने में जुटे हैं।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में अजरबैजान का अहम दौरा कर वहां के राष्ट्रपति और विदेश मंत्री के साथ विस्तृत वार्ता की। इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के सामान्यीकरण और रणनीतिक जुड़ाव के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐतिहासिक रूप से तुर्की और पाकिस्तान के करीबी रहे अजरबैजान के साथ भारत के रिश्तों में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान गंभीर तल्खी आ गई थी। वहीं, दूसरी ओर आर्मेनिया के साथ भारत के रक्षा और व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत होते रहे हैं। इसके बावजूद, बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच नई दिल्ली और बाकू अब कूटनीतिक दूरी को कम करने के प्रयास में हैं।
हालिया कूटनीतिक घटनाक्रमों से कम हुई दोनों देशों की दूरी
भारत और अजरबैजान के बीच कूटनीतिक समझ में बदलाव दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। पहला अवसर संयुक्त राष्ट्र (UN) में आया, जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के संबोधन के दौरान पाकिस्तान और तुर्की समेत कई मुस्लिम देशों ने सदन का बहिष्कार किया था। इसके विपरीत, अजरबैजान और भारत के राजनयिक उस दौरान सदन में उपस्थित रहे, जिसे लेकर तुर्की में अजरबैजान के रुख की आलोचना भी हुई थी।
दूसरा वाकया बाकू में 15 अक्टूबर को आयोजित एशिया में संवाद और विश्वास-निर्माण उपायों पर सम्मेलन (CICA) के सातवें शिखर सम्मेलन का है। यहां कई इस्लामिक देशों ने इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग के वक्तव्य का बहिष्कार किया था, जबकि भारतीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह बैठक में उपस्थित रहे। इन घटनाक्रमों के बाद बनी अनुकूल परिस्थितियों के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बाकू की यात्रा कर शीर्ष नेतृत्व से सीधा संवाद स्थापित किया।
अप्रैल 2026 में विदेश कार्यालय स्तर की वार्ता से शुरू हुआ सुधार
जयशंकर इससे पूर्व वर्ष 2019 में अजरबैजान गए थे। संबंधों में बर्फ पिघलने के संकेत इस वर्ष अप्रैल में तब मिले, जब विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बाकू का दौरा किया। 3 अप्रैल को आयोजित विदेश कार्यालय स्तर की बैठक में दोनों पक्षों ने व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, दवा उद्योग, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की गहन समीक्षा की थी।
इस बैठक के आधिकारिक बयान में ‘सीमा पार आतंकवाद’ से निपटने के मुद्दे को भी शामिल किया गया था, जो भारत की प्राथमिक सुरक्षा चिंताओं से सीधे जुड़ा हुआ है।
ऊर्जा और व्यापारिक दृष्टि से अहम है अजरबैजान
काकेशस क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अजरबैजान की जीडीपी करीब 89 अरब डॉलर है और वह इस क्षेत्र में भारत का प्रमुख व्यापारिक भागीदार है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक निवेश मौजूद है। भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) की विदेशी शाखा ‘ओएनजीसी विदेश’ की अजेरी-चिराग-गुनाशली तेल क्षेत्रों और बाकू-त्बिलिसी-सेहान पाइपलाइन में एक अरब डॉलर से अधिक की हिस्सेदारी है, जिसे कंपनी ने वर्ष 2024 में और बढ़ाया था।
इसके साथ ही पर्यटन क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंध बेहतर रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में लगभग 1,66,944 भारतीय पर्यटकों ने अजरबैजान की यात्रा की थी। दोनों देशों के बीच यह बढ़ती आर्थिक और कूटनीतिक निकटता भविष्य के सहयोग के नए द्वार खोल रही है।