Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने शिमला के टॉलैंड क्षेत्र में नगर निगम द्वारा की जा रही खतरनाक वर्टिकल हिल कटिंग पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश चिराग भानु सिंह की खंडपीठ ने उमा महाजन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार और निगम को नोटिस भेजा है।
याचिकाकर्ता ने अदालत में टॉलैंड क्षेत्र की पुरानी और मौजूदा तस्वीरें पेश करते हुए जमीनी हालात दिखाए। कोर्ट को बताया गया कि खड़ी ढलान की अवैज्ञानिक कटाई से पहाड़ी के ऊपरी हिस्से पर मौजूद हरे-भरे पेड़ों के ढहने का गंभीर खतरा बन गया है। बिना जरूरी अनुमति के कई देवदार पेड़ भी काटे गए हैं।
प्राकृतिक नाले को बंद कर इमारत निर्माण का आरोप
याचिका में यह भी बताया गया कि सड़क के तीखे मोड़ पर कम्युनिटी सेंटर नामक इमारत का निर्माण कराया जा रहा है। इस अनियोजित प्रोजेक्ट के कारण वहां बहने वाला प्राकृतिक नाला पूरी तरह अवरुद्ध होने की कगार पर है। इसके अलावा निर्माण से निकलने वाला भारी मलबा नियमों के खिलाफ कनलोग में फेंका जा रहा है।
यह विवादित क्षेत्र स्वभाव से वन भूमि बताया जा रहा है, जहां निर्धारित डंपिंग साइट के बिना ही मलबा डंप किया जा रहा है। इससे आसपास की हरियाली को व्यापक नुकसान पहुंच रहा है। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित विभाग को विवादित निर्माण स्थल का तत्काल निरीक्षण करने का सख्त आदेश दिया है।
हाई कोर्ट ने अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है कि कटाई से कितने पेड़ प्रभावित हुए हैं और क्या यह क्षेत्र वन विभाग के अंतर्गत आता है। कोर्ट ने प्रशासन को तुरंत ऐसे उपाय करने को कहा है जिससे बचे हुए पेड़ों को कोई आंच न आए। इस मामले की अगली सुनवाई अब 13 अक्टूबर 2026 को होगी।