नेपाल बाढ़ त्रासदी: त्रिशूल 3ए सुरंग में फंसे मजदूरों को बचाने में जुटे टनल एक्सपर्ट अर्नोल्ड डिक्स, उम्मीद बाकी

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Kathmandu News: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और सैलाब से भारी तबाही मची है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 1,252 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,000 से अधिक लोग लापता हैं। इस बीच भोतेकोशी नदी किनारे बने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे मजदूरों को निकालने का अभियान जारी है।

भारत के सिल्क्यारा हादसे में जिंदगियां बचाने वाले प्रसिद्ध टनल विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स त्रिशूल 3ए प्रोजेक्ट के रेस्क्यू ऑपरेशन को तकनीकी मदद दे रहे हैं। उनका कहना है कि सुरंगें बाहर के मौसम से सुरक्षित रहती हैं। वहां तापमान स्थिर रहता है और ताजा हवा मिलने पर लोग लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं।

शवों की खोज नहीं बल्कि जिंदा लोगों को बचाने का अभियान

डिक्स ने स्पष्ट किया कि यह अभियान शव निकालने का नहीं बल्कि जिंदा लोगों को बचाने का है। एक वीडियो फुटेज में करीब 30 लोग जान बचाने के लिए सुरंग की ओर भागते दिखे थे। उन्होंने कहा कि नेपाल का मौजूदा संकट एक साथ 23 सिल्क्यारा जैसे बड़े हादसों से निपटने के समान है।

सुरंग के मुहाने पर कीचड़ और बड़े-बड़े बोल्डर जमा होने से राहत दल को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पत्थरों को हटाने के लिए सेना की मदद से नियंत्रित विस्फोट किए गए। इसके अलावा सुरंग के भीतर पानी रोकने और भरे हुए पानी को बाहर निकालने के लिए एक कृत्रिम ड्रेन बनाई गई है।

वैश्विक मिसालों का हवाला देकर डिक्स ने बंधाया ढांढस

डिक्स ने उम्मीद बनाए रखने के लिए वर्ष 2010 के चिली खदान हादसे और 2018 के थाईलैंड गुफा रेस्क्यू का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि चिली में 33 मजदूर 69 दिनों तक सुरक्षित रहे थे। इसी तरह भारत के सिल्क्यारा में 41 मजदूरों को 17 दिनों के बाद सकुशल बाहर निकाल लिया गया था।

डिक्स ने कहा कि सुरंग से आवाज न आने का मतलब मौत नहीं होता। यह सिर्फ संकेत का अभाव है और दुनिया के बड़े बचाव कार्य सन्नाटे से ही शुरू हुए हैं। राहत टीमें पूरे समर्पण से काम कर रही हैं ताकि पावरहाउस तक पहुंचकर फंसे हुए सभी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

Desh Raj
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