Shimla News: प्रदेश की महत्वाकांक्षी हिमकेयर योजना में हुई कथित अनियमितताओं और फर्जीवाड़े की जांच अब अपने अंतिम व निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। राज्य विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो की विशेष जांच टीम यानी एसआईटी ने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में बाकायदा कैंप ऑफिस स्थापित कर दिया है। जांच टीम अस्पताल के तमाम कागजातों और रिकॉर्ड्स को गहनता से खंगाल रही है।
अधिकारियों और निजी अस्पतालों पर कसेगा शिकंजा
जांच टीम अब केवल कागजों की पड़ताल तक सीमित नहीं है, बल्कि वह दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन के साथ-साथ पूरे पेमेंट सिस्टम और फर्जी क्लेम्स के तारों को जोड़ रही है। एसआईटी इस पूरे प्रकरण में शामिल विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और साठगांठ करने वाले निजी अस्पतालों की भूमिका की बारीकी से जांच कर रही है। जांच का अगला मुख्य कदम दोषियों की आपराधिक जिम्मेदारी तय करना होगा।
विजिलेंस ने आईजीएमसी से मरीजों के इलाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड्स अपने कब्जे में ले लिए हैं। इसमें ऑपरेशन थिएटर का रजिस्टर, मरीजों की डिस्चार्ज समरी और मुख्य फाइलें शामिल हैं। यदि जांच में गड़बड़ी साबित होती है तो जल्द ही दोषियों पर एफआईआर दर्ज होगी और उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है। विजिलेंस की इस सख्त कार्रवाई से संबंधित महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
डिजिटल डेटा और मरीजों के बयानों से मिलान
भुगतान से जुड़े सभी अहम दस्तावेज भी जांच टीम के पास आ चुके हैं। अस्पताल के अधिकारियों व कर्मचारियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और कागजातों का आपस में मिलान हो रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या कागजों में दर्ज मरीजों का वास्तव में इलाज हुआ भी था या नहीं। जांच एजेंसी अब कागजी साक्ष्यों का मिलान बीमा क्लेम और बैंक खातों के डिजिटल रिकॉर्ड से कर रही है।
इसके साथ ही असली लाभार्थियों के बयान दर्ज कर साक्ष्यों की एक मजबूत श्रृंखला तैयार की जा रही है। अगर कोई भी क्लेम पूरी तरह फर्जी पाया जाता है, तो उसमें शामिल सभी व्यक्तियों की सीधी भूमिका तय होगी। इसमें अस्पताल प्रबंधन से लेकर क्लेम प्रोसेस करने वाले कर्मचारी और अंतिम भुगतान को मंजूरी देने वाले उच्च अधिकारी तक सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे।
आरोपियों से होगी रिकवरी और आपराधिक कार्रवाई
विजिलेंस की इस जांच प्रक्रिया में दस्तावेजी जांच और बयान दर्ज करने के बाद सभी सबूतों का कानूनी परीक्षण किया जाएगा। प्रथम दृष्टया आपराधिक मामला बनते ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र रचने जैसी गंभीर धाराएं शामिल की जाएंगी।
मामला दर्ज होने के तुरंत बाद नामजद आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की जाएगी। इसके साथ ही उनकी गिरफ्तारी, बैंक खातों की तालाबंदी और अवैध रूप से हड़पी गई राशि की रिकवरी की कानूनी कार्रवाई भी शुरू होगी। सरकार का स्पष्ट रुख है कि हिमकेयर योजना के नाम पर सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।