Shimla News: हिमाचल प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में बदलाव को लेकर शिक्षक और राज्य सरकार आमने-सामने आ गए हैं। प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले प्रदेशभर से हजारों शिक्षकों ने शिमला के चौड़ा मैदान में न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन किया।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के साथ हुई वार्ता बेनतीजा रहने पर शिक्षकों ने अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन शुरू करने का फैसला किया है। रविवार को मुख्यमंत्री खुद धरना स्थल पर पहुंचे, लेकिन बात नहीं बनी। शिक्षकों ने अधिसूचना वापस होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।
शिक्षक दिवस से पहले प्रणाली निरस्त करने का आश्वासन
शिक्षकों की रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने व्यवस्था में सुधार के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि सरकार न्यू कॉम्प्लेक्स प्रणाली में बड़ा बदलाव करेगी। यदि शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था के हित में जरूरी हुआ, तो इस प्रणाली को पूरी तरह निरस्त भी कर दिया जाएगा।
सरकार ने समस्याओं के समाधान के लिए विशेष कमेटी गठित करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि 5 सितंबर (शिक्षक दिवस) से पहले इस उच्चस्तरीय कमेटी के साथ बैठक होगी। इसमें शिक्षकों की सभी जायज मांगों पर अंतिम और ठोस निर्णय लिया जाएगा।
विरोध प्रदर्शनों के दौरान शिक्षकों पर हुई दंडात्मक कार्रवाइयों को लेकर सरकार ने राहत दी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान प्राथमिक शिक्षकों के खिलाफ की गई निलंबन की सभी कार्रवाइयों, विभागीय जांचों और दर्ज एफआईआर को सरकार पूरी तरह वापस लेगी।
15 दिन की पैदल यात्रा और खाली पदों का मुद्दा
प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष रमेश शर्मा ने बताया कि शिक्षक 15 दिनों की पैदल यात्रा के बाद शिमला पहुंचे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नई भर्तियों से बचने के लिए यह व्यवस्था ला रही है, जिससे शिक्षकों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ेगा।
संघ के अनुसार प्रदेश में जेबीटी के 5,000 से अधिक पद खाली हैं और प्राथमिक स्कूलों में 50 प्रतिशत स्टाफ की कमी है। उन्होंने कहा कि पहले भी मंत्रियों ने वादे पूरे नहीं किए, इसलिए अब आश्वासनों पर भरोसा नहीं है। जरूरत पड़ी तो यह आंदोलन 2027 के चुनाव तक चलेगा।