Shimla News: हिमाचल प्रदेश में मानसून अब विदाई की दहलीज पर पहुंच चुका है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक मौसमी गतिविधियां शांत रहेंगी। इस मानसून सीजन में भारी बारिश और हादसों के कारण अब तक 283 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सरकारी संपत्तियों को 1423 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक शोभित कटियार ने बताया कि प्रदेश में अगले सात दिनों तक मौसम साफ रहेगा। कुछ इलाकों में छिटपुट बारिश देखने को मिल सकती है। 11 सितंबर के बाद बादलों की हलचल थोड़ी बढ़ सकती है, लेकिन भारी बारिश या किसी बड़े मौसम बदलाव के कोई आसार नहीं हैं।
उधर ठियोग-रामपुर नेशनल हाईवे पर मंगलवार सुबह जनोग घाट के पास भूस्खलन से चार बड़े पेड़ सड़क पर गिर गए। यह घटना सुबह करीब पांच बजे हुई, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने पेड़ काटकर रास्ता वाहनों के लिए बहाल कराया।
मौसम विभाग के अनुसार पिछले 12 घंटों में सिरमौर के जैतो बैराज में सबसे ज्यादा 56.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। वहीं पच्छाद में 48.2, मुरारी देवी में 46.0, धौलाकुआं में 33.5 और कोटखाई में 19.3 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। राजधानी शिमला में 3.8 और मनाली में मात्र 2.0 मिलीमीटर पानी बरसा।
निदेशक ने बताया कि इस सीजन राज्य में सामान्य से कम बारिश हुई है। प्रदेश में औसतन 648 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 588 मिलीमीटर ही पानी गिरा। सितंबर में भी बारिश कम रहने के आसार हैं, हालांकि कांगड़ा, चंबा और मंडी के कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।
राज्य से मानसून की आधिकारिक वापसी 25 सितंबर के आसपास संभावित है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के आंकड़ों के अनुसार 30 जून से सात सितंबर तक 283 लोगों ने जान गंवाई है। हादसों में 505 लोग घायल हुए और तीन लापता हैं। इसके अलावा 169 लोगों की मौत सड़क हादसों में दर्ज हुई।
प्राकृतिक आपदा में 468 मवेशी मारे गए हैं और सैकड़ों मकानों को भारी क्षति पहुंची है। 123 पक्के और कच्चे मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए, जबकि 495 मकान आंशिक रूप से टूटे हैं। लोक निर्माण, जलशक्ति और बिजली विभाग सहित अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को कुल 1423.09 करोड़ रुपये का भारी नुकसान पहुंचा है।