हिमाचल में बेसहारा गोवंश के लिए बनेंगे 7 नए गौ सदन, सड़कों पर हादसों और हमलों से मिलेगी बड़ी राहत

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश में सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए सरकार चार जिलों में एक अभयारण्य और छह नए गौ सदन बना रही है। इनमें करीब 2,500 पशुओं को आश्रय मिलेगा। वर्तमान में 222 केंद्रों में 23,018 पशु रह रहे हैं, फिर भी सड़कों पर हादसे जारी हैं।

कांगड़ा, ऊना, मंडी और कुल्लू जिलों में इन नए केंद्रों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। हिमाचल गोसेवा आयोग इनकी स्थापना करवा रहा है। नए केंद्र बनने से सड़कों पर लावारिस घूम रहे पशुओं के हमलों और सड़क हादसों में कमी आने की पूरी उम्मीद है। इनका काम जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।

गोसेवा आयोग निजी क्षेत्र को भी नए गौ सदन बनाने के लिए 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद देता है। इसके अलावा पुराने केंद्रों के विस्तार के लिए 5 लाख रुपये तक की सहायता राशि दी जाती है। आए दिन सड़कों पर इन बेसहारा जानवरों की वजह से लोग चोटिल हो रहे हैं और हादसे बढ़ रहे हैं।

पंचायती राज अधिनियम 2006 के तहत पशुपालकों को ग्राम पंचायत में अपने पशुओं का रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है। पशु को लावारिस छोड़ने पर पहली बार 500 रुपये और दूसरी बार 700 रुपये जुर्माने का नियम है। हालांकि जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। कई पशुओं के कान कटे मिलने से पहचान करना भी मुश्किल हो जाता है।

पशुपालन विभाग बेसहारा पशुओं की संख्या पर लगाम लगाने के लिए शत-प्रतिशत टैगिंग का काम कर रहा है। इसके साथ ही विभाग नस्ल सुधार पर भी पूरा जोर दे रहा है। सेक्स-सॉर्टेड सीमेन की मदद से कृत्रिम गर्भाधान कराकर बछड़ी पैदा होने की संभावना को बढ़ाया जा रहा है, ताकि किसान इन्हें सड़कों पर न छोड़ें।

पंजीकृत गौ सदनों में रहने वाले पशुओं के लिए सरकार गोपालन योजना के तहत हर महीने प्रति पशु 1,200 रुपये की मदद देती है। प्रदेश के 222 गौ अभयारण्यों और सदनों पर सरकार सालाना 33.14 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि गोसदनों की क्षमता बढ़ाकर इस संकट का पक्का हल निकाला जाएगा।

Right News Desk
Right News Desk
लॉ और पत्रकारिता स्नातक, पत्रकारिता में 11 वर्ष का अनुभव

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