हिमाचल प्रदेश में सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों की बहू भी नहीं लड़ सकेगी स्थानीय निकाय चुनाव, संशोधन बिल पास।

Share

- Advertisement -

Shimla News: हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने पंचायती राज कानून में एक बड़ा बदलाव पास किया है। नए नियम के तहत सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले परिवारों की बहू भी पंचायत या शहरी निकाय चुनाव नहीं लड़ पाएगी। विपक्ष के कड़े विरोध के बीच यह विधेयक विधानसभा में ध्वनिमत से पारित हुआ।
हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1994 में यह संशोधन किया गया है। ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने विधानसभा में इस बिल को पेश किया था। संशोधन के जरिए अब कानून में ‘परिवार’ की परिभाषा को बदलते हुए इसमें बहू को भी स्पष्ट रूप से शामिल कर लिया गया है।
पुराने कानून के अनुसार यदि किसी व्यक्ति ने सरकारी जमीन पर कब्जा किया है तो उसका बेटा चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होता था। लेकिन बहू इस नियम के दायरे में नहीं आती थी। इस वजह से अयोग्य घोषित लोग खुद चुनाव न लड़कर अपनी बहू को चुनाव मैदान में उतार देते थे।
नए संशोधन के लागू होने से यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाएगा। सरकार का तर्क है कि इस बदलाव से उन मामलों पर रोक लगेगी, जिनमें अयोग्य व्यक्ति अपने परिवार के सदस्यों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव लड़ते हैं। पंचायती राज मंत्री के अनुसार यह कदम कानूनी सलाह के बाद उठाया गया है।
दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल बीजेपी ने इस संशोधन का पुरजोर विरोध किया है। बीजेपी विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि शादी के बाद बहू दूसरे परिवार से आती है। इसलिए ससुराल वालों के किए किसी काम की सजा बहू को नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नियम कुछ लोगों को निशाना बना रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने बिल को महिला विरोधी करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की जिद के कारण यह कानून लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह फैसला लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करता है और कोर्ट की जांच में टिक नहीं पाएगा।
सरकार का कहना है कि राज्य चुनाव आयोग ने लगभग छह साल पहले परिवार की परिभाषा बदलने का सुझाव दिया था। यह संशोधन उसी पुरानी सिफारिश और विधिक राय पर आधारित है। हालांकि विपक्ष के तेवरों से साफ है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में कानूनी लड़ाई और बड़ी राजनीतिक बहस का रूप लेगा।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

Read more

Related News