Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद भी कई विभागों में कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर जमे हुए हैं। कई सरकारी उपक्रमों में स्टाफ अपने मूल विभाग में लौटने को तैयार नहीं है। इस बीच हिमाचल पथ परिवहन निगम के चालकों और अन्य कर्मचारियों द्वारा नियमों को दरकिनार करने के गंभीर मामले सामने आए हैं।
परिवहन निगम के चालकों पर लगे गंभीर आरोप
राज्य सचिवालय से परिवहन निगम के दस चालक अभी तक वापस नहीं लौटे हैं। आरोप है कि ये चालक रसूखदार लोगों के संरक्षण में काम कर रहे हैं। इसके अलावा पचास से अधिक चालक अधिकारियों के बंगलों पर घरेलू कामकाज संभाल रहे हैं। कई अधिकारी तबादला होने पर चालकों को अपने साथ दूसरे शहरों में ले गए।
अदालती आदेश से बचने के लिए निकाला नया रास्ता
शिक्षा विभाग ने अपने कर्मचारियों को मूल पदों पर भेज दिया है, लेकिन बाकी विभागों में सुस्ती है। प्रभावशाली लोगों ने अदालती आदेश से बचने के लिए नया तोड़ निकाल लिया है। करीब पंद्रह से बीस शिक्षकों और प्रवक्ताओं ने नियमों में बदलाव करवाकर समायोजन ले लिया, ताकि उन्हें स्कूल न लौटना पड़े।
नियमों के तहत सरकारी महकमों में प्रतिनियुक्ति की अधिकतम समय सीमा तीन से पांच वर्ष तय होती है। यह अवधि पूरी होने पर कर्मचारी की घर वापसी जरूरी होती है। इसके विपरीत कई कर्मचारी राजनीतिक पहुंच के दम पर वर्षों से जमे हैं। एचआरटीसी के एक चालक ने तो पंचायतीराज विभाग में जाने की नई अर्जी लगा दी है।