Kullu News: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की भुंतर तहसील स्थित थूंजा गांव में पहाड़ियों के दरकने और प्राकृतिक जलस्रोतों के अस्तित्व पर मंडराते खतरे पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में अहम सुनवाई हुई। ट्रिब्यूनल ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी पक्षों को आठ सप्ताह में अपनी जवाबदेही पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले में सभी पक्षों को अपनी प्लीडिंग्स पूरी करने के लिए आठ हफ्ते का वक्त दिया है। ट्रिब्यूनल अब इस मामले पर 17 नवंबर को अगली सुनवाई करेगा। सुनवाई के दौरान दो पुराने अंतरिम आवेदनों (आईए संख्या 545/2026 और 579/2026) को निष्प्रभावी मानकर पूरी तरह निपटा दिया गया।
मूल याचिका (ओए संख्या 98/2026) में ग्रामीणों ने थूंजा गांव की ढलान पर लग रहे 5-5 मेगावाट के दो स्मॉल हाइड्रो प्रोजेक्ट्स कसोल और ग्राहण कसोल के निर्माण पर कड़ा विरोध जताया है। ग्रामीणों का आरोप है कि टनलिंग, पाइपलाइन बिछाने और अनियंत्रित ब्लास्टिंग से पीने के पानी के इकलौते स्रोत ग्राहण नाले को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि किसी भी स्लोप-स्टेबिलिटी असेसमेंट, वाइब्रेशन इम्पैक्ट स्टडी या डिजास्टर-रिस्क इंस्पेक्शन के बिना ही पहाड़ियों पर ब्लास्टिंग शुरू कर दी गई। जोरदार धमाकों से हो रहे वाइब्रेशन के कारण पूरे गांव के लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इस वजह से गांव के अस्तित्व पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
वर्ष 2016 की जॉइंट इंस्पेक्शन रिपोर्ट का हवाला देते हुए याचिका में बताया गया कि इस क्षेत्र की ढलानें बेहद कमजोर हैं। इसके अलावा, दोनों प्रोजेक्ट कनावर वाइल्डलाइफ सेंचुरी के नोटिफाइड इको-सेंसिटिव जोन में आते हैं। प्रोजेक्ट का मुख्य हिस्सा अभ्यारण्य की सीमा के भीतर पड़ता है, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान हो सकता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने सभी संबंधित उत्तरदाताओं को तुरंत नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का सख्त निर्देश दिया है। ट्रिब्यूनल के इस रुख से अब अधिकारियों और प्रोजेक्ट कंपनियों को समय पर अपना जवाब दाखिल करना होगा। इस सुनवाई पर पूरे इलाके के लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।