Lahaul Spiti News: लाहुल स्पीति जिले में बिना किसी बारिश या बादल फटने के चिलचिलाती धूप में अचानक आ रही भीषण बाढ़ ने सबको चौंका दिया है। एसएएनडीआरपी जर्नल में प्रकाशित पर्यावरणविद परिणीता दांडेकर की रिपोर्ट के अनुसार जाहलमा नाले का यह अनोखा व्यवहार क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा बन गया है।
पीर पंजाल श्रृंखला से निकलकर चिनाब नदी में मिलने वाला यह नाला पांच सालों से लगातार विकराल रूप ले रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार सुबह और रात में शांत रहने वाला यह नाला दोपहर में पत्थरों और मलबे से भरा उफान मारता है। वैज्ञानिक भी इस अनोखी आपदा से पूरी तरह हैरान हैं।
आईआईटी मंडी और जीएसआई के अध्ययनों से पता चलता है कि यह संकट पर्मीफ्रास्ट के तेजी से खिसकने की वजह से पैदा हो रहा है। इसके अलावा लिंदुर गांव प्रतिवर्ष 7.9 सेंटीमीटर की दर से धंस रहा है। ग्लेशियरों के पास 20 फीट गहरी और दो फीट चौड़ी दरारें भी पड़ चुकी हैं।
ग्लोबल वार्मिंग के कारण अंदर जमी बर्फ तेजी से पिघलकर नदी के तल में समा रही है। इससे पहाड़ों की ढलानों की स्थिरता पूरी तरह खत्म हो रही है। इस लगातार आ रही बाढ़ की वजह से जाहलमा नाले का पुल हर साल टूट जाता है, जिससे अटल टनल और मनाली का संपर्क कट जाता है।
सड़क संपर्क टूटने से स्थानीय किसानों की गोभी और मटर जैसी नकदी फसलें समय पर बाजार नहीं पहुंच पाती हैं। इसके बावजूद जाहलमा नाले पर अभी तक कोई भी स्वचालित मौसम केंद्र या डिस्चार्ज गेज नहीं लगाया गया है। प्रशासनिक विभागों में तालमेल की कमी से केवल कागजी काम ही हो पा रहा है।
अब जाहलमा के अलावा शांसा, करपट, जिस्पा और मियाड़ घाटी के धोंधल नाले में भी ऐसे ही मामले सामने आ रहे हैं। अगर समय रहते इन घटनाओं पर वैज्ञानिक अध्ययन करके पुख्ता कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह पूरा क्षेत्र एक बड़ी मानवीय त्रासदी का शिकार हो सकता है।