कुल्लू दशहरा: लाल चंद प्रार्थी कलाकेंद्र में लोकनृत्य प्रतियोगिता का जलवा, पारंपरिक पट्टू-थिपू और पूलें पहनकर महिलाओं ने मोहा मन

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Kullu News: अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के दौरान ऐतिहासिक लाल चंद प्रार्थी कलाकेंद्र में लोक संस्कृति के अनूठे रंग बिखर रहे हैं। यहां आयोजित लोकनृत्य प्रतियोगिता में महिला और युवक मंडल पारंपरिक प्रस्तुतियों से कुल्लवी संस्कृति को जीवंत कर रहे हैं। इस आयोजन में कुल्लू की प्राचीन वेशभूषा और लोक परंपराओं की विशेष झलक देखने को मिल रही है।

अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के सांस्कृतिक मंच पर लोकनृत्य प्रतियोगिता के तीसरे दिन पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं की कुल्लवी नाटी ने दर्शकों का मन मोह लिया। प्रतियोगिता में एक महिला मंडल की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें महिलाओं ने पारंपरिक कुल्लवी पट्टू-थिपू पहनकर और पैरों में पुराने जमाने की पूलें पहनकर पुरानी लोक परंपराओं को मंच पर जीवंत कर दिया।

इस अनूठी प्रस्तुति ने दर्शकों को कुल्लू की प्राचीन संस्कृति और पारंपरिक पहनावे की याद दिला दी। महिलाओं ने लोकनृत्य के साथ-साथ पारंपरिक रहन-सहन की अनूठी झलक भी पेश की, जिससे उत्सव का माहौल पूरी तरह सांस्कृतिक रंगों में रंग गया।

सांस्कृतिक विरासत को मिल रहा प्रोत्साहन

इस लोकनृत्य प्रतियोगिता के माध्यम से दशहरा उत्सव में स्थानीय लोक कलाओं, रीति-रिवाजों और पारंपरिक वेशभूषा को बढ़ावा मिल रहा है। प्रतियोगिता में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से महिला मंडल और युवक मंडल पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं।

आयोजन के पहले दिन 27 महिला मंडलों और सांस्कृतिक दलों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया था, जबकि 24 अक्टूबर को 23 महिला मंडल और युवक मंडल प्रस्तुतियां देने पहुंचे। इसके बाद रविवार, 25 अक्टूबर को भी 20 से अधिक महिला मंडलों ने अपनी प्रस्तुतियों से मंच को लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया।

महिला मंडलों में दिखा भारी उत्साह

जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला ठाकुर ने बताया कि इस बार लोकनृत्य प्रतियोगिता में महिला मंडलों का खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार अधिक संख्या में महिला मंडलों ने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भागीदारी की है, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर के प्रति लोगों के गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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