Jwalamukhi News: ज्वालामुखी में स्लेटर से सपड़ी तक नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण कार्य पर स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध जताया है। बार-बार बदलती निशानदेही और दशकों पुरानी दुकानों को नोटिस मिलने से लोग परेशान हैं। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन की पूरी प्रक्रिया पर पक्षपात और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर अधिकारी आए दिन जमीन की नई सीमाएं तय कर रहे हैं। इससे जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद बढ़ रहा है। कई दुकानदारों और भवन मालिकों को निर्माण गिराने के सरकारी नोटिस मिले हैं। इनमें से कई दुकानें पिछले 70 सालों से लगातार चल रही हैं।
प्रभावित दुकानदारों का कहना है कि जब ये निर्माण बने थे, तब संबंधित विभाग ने कोई आपत्ति क्यों नहीं जताई? इतने दशकों तक निर्माण चलने के बाद अब अचानक इन्हें सड़क की सीमा में बताकर कार्रवाई की जा रही है। लोग इस अचानक हुई कार्रवाई के पीछे की मंशा पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
जमीन की निशानदेही और नियमों पर उठे गंभीर सवाल
लोगों के मुताबिक जमीन की पैमाइश में लगातार असमंजस बना हुआ है। हर बार की जांच में सड़क की सीमा बदल जाती है। प्रभावितों का कहना है कि पूरे प्रोजेक्ट में सड़क की चौड़ाई का एक समान पैमाना लागू होना चाहिए। अलग-अलग जगहों और लोगों के लिए अलग नियम तय करना पूरी तरह गलत है।
स्थानीय लोग इस पूरी प्रक्रिया में राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं। उनका दावा है कि सत्ता से जुड़े लोगों को राहत मिल रही है, जबकि आम नागरिकों और विरोधी सोच के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। लोगों की मांग है कि कार्रवाई राजनीतिक पहुंच के बजाय सरकारी रिकॉर्ड और नक्शों के आधार पर हो।
वन भूमि कटिंग और फुटपाथ निर्माण पर नाराजगी
स्लेटर पंचायत के पास हुई कटिंग को लेकर भी जनता में रोष है। लोगों का कहना है कि एक तरफ पुरानी सड़क की जमीन उपलब्ध थी। इसके बावजूद दूसरी तरफ जंगल की जमीन काटी गई। ग्रामीण चाहते हैं कि विभाग बताए कि यह फैसला किस तकनीकी आधार और सर्वे के तहत लिया गया है।
मार्ग पर केवल एक तरफ फुटपाथ बनाने का भी कड़ा विरोध हो रहा है। लोगों का कहना है कि बाजार, स्कूल, अस्पताल और मंदिर जाने वाले पैदल यात्रियों के लिए दोनों तरफ सुरक्षित रास्ता होना चाहिए। एक तरफ फुटपाथ होने से लोगों को बार-बार व्यस्त हाईवे पार करना पड़ेगा, जिससे हादसे बढ़ सकते हैं।
काम के तरीके और प्रोजेक्ट की निरंतरता पर सवाल
अंब-स्लेटर से शुरू हुआ निर्माण कार्य पुलिस स्टेशन के पास अचानक रोक दिया गया। इसके बाद सपड़ी की तरफ से काम शुरू किया गया। लोग जानना चाहते हैं कि काम बीच में क्यों रोका गया। किसी बड़े प्रोजेक्ट में काम का क्रम तय होना चाहिए ताकि जनता को सही जानकारी मिल सके।
प्रशासनिक मनमानी से परेशान होकर कई प्रभावित परिवारों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। लोगों का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर दशकों पुराने रोजगार को खत्म नहीं किया जाना चाहिए। पूरी योजना की डीपीआर और नक्शे सार्वजनिक करके स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
Editor: Mukesh Kumar, Jwalamukhi