एचआरटीसी घाटा कम करने के लिए अंतरराज्यीय रूटों पर वैट लीज मॉडल से चलाएगा बसें, कानूनी पहलुओं की जांच जारी

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Shimla News: हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) भारी घाटे से उबरने के लिए दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब, जम्मू और उत्तराखंड रूटों पर वैट लीज आधार पर बसें चलाने की योजना बना रहा है। इस फॉर्मूले के तहत बस और ड्राइवर निजी ऑपरेटर के होंगे, जबकि कंडक्टर एचआरटीसी का रहेगा।

अंतरराज्यीय रूटों पर परमिट और टैक्स की कानूनी अड़चनें

निगम अधिकारियों के अनुसार अन्य राज्यों में जाने वाले करीब 80 प्रतिशत रूट घाटे में चल रहे हैं। हालांकि, दूसरे राज्यों में बसें संचालित करने के लिए टैक्स और परमिट से जुड़ी कानूनी बाधाएं सामने आ रही हैं। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की बैठक के बाद इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

निगम पर वर्तमान में 2,250 करोड़ रुपये का घाटा है। नई व्यवस्था से निगम को नई बसें खरीदने और ड्राइवर भर्ती करने का भारी खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। बस मालिक को प्रति किलोमीटर के आधार पर भुगतान होगा, जिससे निजी लग्जरी बसों की प्रतिस्पर्धा का मुकाबला किया जा सकेगा।

पहले भी शुरू होकर बंद हो चुकी है यह योजना

वर्ष 2003 से 2007 के दौरान भी निगम ने 120 बसें वैट लीज पर चलाई थीं। उस समय 40 से 60 रुपये प्रति किलोमीटर भुगतान होता था। हालांकि कर्मचारियों के कड़े विरोध और सत्ता परिवर्तन के बाद इसे बंद कर दिया गया था। अब वित्तीय सुधारों के तहत दोबारा यह कदम उठाया जा रहा है।

घाटा घटाने के लिए बनाई 13 सूत्रीय कार्ययोजना

वित्तीय संकट के चलते निगम पिछले तीन वर्षों में 282 रूट बंद कर चुका है, जिनमें 196 ग्रामीण रूट शामिल हैं। सरकार ने घाटा कम करने के लिए 13 सूत्रीय कार्ययोजना तैयार की है। इसके अलावा 297 नई इलेक्ट्रिक बसों से रोजाना सात से आठ लाख रुपये की बचत का दावा किया गया है।

Desh Raj
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