हिमाचल हाई कोर्ट का कर्मचारियों के पक्ष में बड़ा फैसला, 15 मई 2003 से पहले शुरू भर्ती पर मिलेगा पुरानी पेंशन का हक

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के हक में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि भर्ती प्रक्रिया 15 मई 2003 से पहले शुरू हुई थी और नियुक्ति बाद में मिली, तो भी कर्मी पुरानी पेंशन योजना का हकदार होगा।

प्रशासनिक देरी के कारण नियुक्ति टलने पर आया कोर्ट का फैसला

न्यायाधीश रंजन शर्मा की पीठ ने सेवानिवृत्त ड्राइंग टीचर शकुंतला देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अहम फैसला सुनाया। शिक्षा विभाग ने अप्रैल 2003 में बैचवाइज भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। याचिकाकर्ता ने 21 से 26 अप्रैल 2003 के दौरान काउंसलिंग में भाग लिया था, लेकिन परिणाम देरी से आया।

विभाग की ओर से परिणाम में देरी के चलते उन्हें सितंबर 2003 में नियुक्ति दी गई। 31 दिसंबर 2016 को सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें नई पेंशन स्कीम में रखा गया था, जिसे उन्होंने चुनौती दी थी। अदालत ने माना कि प्रशासनिक देरी का नुकसान किसी भी कर्मचारी को नहीं होना चाहिए।

वित्त विभाग के नए ज्ञापन के आधार पर मिला विकल्प

सुनवाई के दौरान कोर्ट में वित्त विभाग द्वारा 9 जुलाई 2026 को जारी नया कार्यालय ज्ञापन पेश किया गया। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि 15 मई 2003 से पहले विज्ञापित भर्तियों वाले कर्मी एक-बारगी विकल्प से ओपीएस में आ सकते हैं। सरकार ने इस नीतिगत बदलाव को पहले ही मंजूरी दी है।

हाई कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता को पुरानी पेंशन योजना चुनने के लिए 31 अक्टूबर 2026 तक का समय दिया है। अदालत के इस निर्णय से उन सभी कर्मियों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी नियुक्ति प्रशासनिक प्रक्रिया में हुई देरी के कारण 15 मई 2003 के बाद हुई थी।

Desh Raj
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