Shimla News: हिमाचल प्रदेश में लोगों की निजी जमीन पर सड़कें बनने के बाद भी सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में एंट्री दर्ज नहीं हो पाई है। विधानसभा में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने माना कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण लगभग एक हजार विवादित मामले अदालतों में पहुंच चुके हैं।
जमीन विवाद निपटाने के लिए होगी मौके पर गिरदावरी
प्रश्नकाल के दौरान राजस्व मंत्री ने बताया कि ग्रामीणों ने जनहित में स्वेच्छा से जमीनें दी थीं। निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद विभाग के नाम राजस्व एंट्री नहीं चढ़ाई गई। इस कारण अब जमीन मालिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं। समस्या सुलझाने के लिए गठित कैबिनेट सब-कमेटी ने रिकॉर्ड दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।
मंत्री ने जानकारी दी कि विधानसभा से पारित हिमाचल प्रदेश लोक उपयोगिता परिवर्तन निषेध विधेयक एक साल से राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए लंबित है। जनहित से जुड़े इस अहम कानून को सरकार दोबारा सदन में लाएगी। वहीं जमीन की वास्तविक स्थिति देखने के लिए अधिकारियों को मौके पर जाकर खसरा-गिरदावरी करने के कड़े निर्देश मिले हैं।
परौर-पधर फोरलेन प्रोजेक्ट की डीपीआर पर काम तेज
विधानसभा में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि कांगड़ा और मंडी को जोड़ने वाले प्रस्तावित परौर-पधर फोरलेन की डीपीआर का काम शुरू हो गया है। एनएचएआई ने 12 मार्च 2026 को कंसल्टेंट नियुक्त किया है। वर्तमान में सड़क की प्राथमिक अलाइनमेंट तय की जा रही है, जिसकी मंजूरी के बाद निर्माण का रास्ता साफ होगा।
लोक निर्माण मंत्री ने यह भी बताया कि चक्की से परौर तक बन रहे फोरलेन के पांच में से एक पैकेज का निर्माण पूरा हो चुका है। इसके अलावा तीन पैकेजों पर काम तेजी से चल रहा है और एक की डीपीआर बन रही है। इस परियोजना से प्रभावित 5,734 परिवारों के उचित मुआवजे के लिए एनएचएआई से चर्चा होगी।
