हिमाचल के जनजातीय इलाकों में सस्ती होगी रेत-बजरी, सुगम माइनिंग लीज नीति का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा गया

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय और दूरदराज क्षेत्रों में घर बनाना अब आसान हो जाएगा। राज्य सरकार रेत-बजरी के लिए लीज प्रक्रिया को सुगम बनाने जा रही है। उद्योग विभाग के माइनिंग विंग ने नियमों में ढील का नया प्रस्ताव तैयार करके मंजूरी के लिए सचिवालय भेज दिया है।

लाहुल-स्पीति, किन्नौर, पांगी-भरमौर और डोडरा-क्वार में वर्तमान में रेत-बजरी की भारी किल्लत है। मौजूदा नियमों के तहत खनन लीज के साथ क्रशर लगाना अनिवार्य है। कम आबादी और सीमित मांग के कारण यहां क्रशर लगाना संभव नहीं हो पाता। इस वजह से लोग मजबूरी में अवैध खनन का सहारा लेते हैं।

नए प्रस्ताव के तहत जनजातीय और दुर्गम इलाकों में लीज का अधिकार एसडीएम की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय कमेटी को मिलेगा। पहले इसके लिए शिमला से अनुमति लेनी पड़ती थी। इस पूरी प्रक्रिया में महीनों का समय लग जाता था। इसके अलावा क्रशर लगाने की अनिवार्य शर्त को भी हटाया जाएगा।

प्रस्ताव में छोटे नालों और खड्डों से सीमित मात्रा में रेत-बजरी निकालने का परमिट मिलेगा। स्थानीय निवासियों, ग्राम पंचायतों और सरकारी निर्माण कार्यों के लिए अलग कोटा तय होगा। विभाग के इस प्रस्ताव को आगामी कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिलने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

वर्तमान में बड़े ठेकेदार दुर्गम इलाकों में काम करने में रुचि नहीं दिखाते हैं। इसका सीधा असर निर्माण सामग्री की कीमतों पर पड़ रहा है। लाहुल में एक ट्रक रेत-बजरी 35 से 40 हजार रुपये में मिलती है। वहीं मंडी जिले में यही सामग्री 8 से 10 हजार रुपये में उपलब्ध है।

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने भी माना कि दुर्गम क्षेत्रों की पुरानी लीज नीति व्यावहारिक नहीं थी। नए बदलावों से अवैध खनन पर रोक लगेगी। इसके अलावा मनरेगा, पीएम आवास और बॉर्डर रोड के निर्माण कार्यों में तेजी आएगी। साथ ही प्रदेश सरकार को रॉयल्टी मिलने का रास्ता भी साफ होगा।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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